Monday, September 30, 2019

Howdy Modi इवेंट की स्पॉन्सर Tellurian से Petronet के समझौते पर उठे सवाल।

 Tellurian वो कम्पनी है जो अमेरिका में मोदी जी के इवेंट की स्पॉन्सर थी। ये कम्पनी अमेरिका में LNG गैस के क्षेत्र में कारोबार करती है। इसकी लम्बे समय से भारत में LNG क्षेत्र में कारोबार करने वाली पेट्रोनेट से गैस खरीद और उत्पादन में करार के लिए बातचीत चल रही थी। लेकिन भारत में LNG की कम मांग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते कम्पीटिशन के कारण पेट्रोनेट इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रही थी। साथ ही कुछ शर्तों पर भी सहमति नहीं हो पा रही थी।
               लेकिन मोदी जी के इवेंट के स्पॉन्सर करने के बाद दोनों कम्पनियों ने करार पर दस्तखत कर दिए जिसके अनुसार  पेट्रोनेट अमेरिका में 2. 5 बिलियन डॉलर का निवेश करेगी। अभी अमेरिकी चुनाव में राष्ट्रपति ट्रम्प को वहां निवेश की बहुत जरूरत है ताकि अमेरिकी युवाओं को रोजगार मिल सके। इस समझौते पर दस्तखत होते ही भारतीय शेयर बाजार में पेट्रोनेट का शेयर 7 % गिरा। क्योंकि बाजार इसे घाटे का सौदा मान रहा है। ऐसे समय में जब भारत को खुद अपने यहां निवेश की सख्त जरूरत है तो ऐसे समय में उल्टा निवेश देकर आने की बात किसी को गले नहीं उतर रही।
               मोदी जी के इवेंट को एक विदेशी कम्पनी स्पॉन्सर करती है, फिर उसी कम्पनी से व्यापारिक करार होता है और भक्त इसे सेलिब्रेट कर रहे हैं। 

Friday, November 30, 2018

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव के बाद तनाव में क्यों है भाजपा।

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में वोट डालने का काम खत्म हो चुका है। अब सभी को 11 दिसंबर का इंतजार है। लेकिन चुनाव की समाप्ति के बाद भाजपा के नेता तनाव में दिख रहे हैं। कुछ दिन पहले तक जिन राज्यों को भाजपा के लिए आसान माना जा रहा था, वहां स्थिति बदल चुकी है। कुछ संकेत भाजपा नेताओं को लगातार परेशान कर रहे हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस के खेमे में शान्ति और निश्चिन्तता दिखाई दे रही है। इसकी एक झलक कांग्रेस नेता कमलनाथ के उस जवाब में भी दिखाई देती है। जब उनसे चुनाव के बाद अपना आकलन बताने को कहा गया तो उनका जवाब था, " दो चीजें एकदम आसानी से निपट गयी, एक चुनाव और दूसरी भाजपा। "
                वैसे भाजपा के तनाव की कुछ ख़ास वजहें भी हैं। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों प्रदेशों में भाजपा 15 साल की एंटी-इंकम्बैंसी से मुकाबिल थी जो किसी के लिए भी चिंता का कारण हो सकती हैं। लेकिन दोनों प्रदेशों में कांग्रेस ने कोई मुख्यमंत्री का चेहरा प्रस्तुत नहीं किया था जिसे भाजपा  अपने लिए फायदे का सौदा मान रही थी। दूसरा उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रचार पर बहुत भरोसा था। लेकिन इस बार कांग्रेस ने मोदीजी को कोई मौका दिया। मोदीजी ने हमेशा की तरह,  मेरी माँ को गाली दी , जैसे वाक्यों में प्रचार को लपेटने की कोशिश जरूर की लेकिन इस बार वो कामयाब नहीं हुए। मोदीजी के जिस करिश्मे का भाजपा को भरोसा था वो इस बार गायब था।
                भाजपा नेताओं की चिंता का दूसरा कारण इस बार किसानो और बेरोजगारी के सवालों का इलेक्शन पर हावी होना था। इस बार हिंदुत्व और गाय जैसे मुद्दों की जगह किसानो की समस्याएं केंद्र में थी। कांग्रेस के कर्जमाफी के वायदे के बाद जिस तरह किसानो ने चुनाव से पहले फसल बेचना बंद कर दिया वो अपने आप में हैरान कर देने वाला है।  जब किसान मंडी में अपनी फसल बेचता है तो फसल की कीमत उसके बैंक खाते में जमा होती है। बैंक इस में से अपनी राशी काट लेता है। इसलिए किसान अपनी फसल लेकर मंडी में ही नहीं जा रहे। वो राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने और कर्जमाफी का  इंतजार कर रहे हैं।
               इसके अलावा जो सबसे बड़ा कारण भाजपा नेताओं को चिंता में डाले हुए है वो है 2019  मोदीजी को होने वाली मुश्किल के अनुमान का। असल में चुनाव वाले तीनो भाजपा शासित राज्यों में भाजपा राजस्थान को पहले ही कमजोर मान कर चल रही है। इन तीनो राज्यों में कांग्रेस ने किसी को भी मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। अगर इनमे नतीजे भाजपा के खिलाफ आ जाते हैं तो 2019 के चुनाव में उसके सबसे बड़े मुद्दे की हवा निकल जाएगी। ये मुद्दा है मोदी के सामने कौन? लोग ये मान लेंगे की चुनाव जीतने के लिए चेहरा कोई अनिवार्य शर्त नहीं है। यही है भाजपा की चिंता का सबसे बड़ा कारण।