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Monday, October 5, 2015

Vyang -- हाय ! हमे नही मिला नोबल प्राइज ( Noble Prize )

                   
   हाय ! हमे नोबल प्राइज नही मिला। चिकित्सा का नोबल प्राइज इस बार चीन की यूयूतू को दे दिया और हमारे महर्षि और दुनिया के महान चिकित्सक बाबा रामदेव पपीते के पत्ते लेकर दिल्ली के हस्पतालों में फोटो उतरवाते रह गए। हमे इस बार के नोबल प्राइज का बहुत दुःख है। कारण ये है की एक तो ये मलेरिया के इलाज के लिए दिया गया है। दूसरा ये कहकर दिया गया है की यूयूतू ने पारम्परिक इलाज पर खोज करके मलेरिया के लिए असरकारक दवा बनाई। हमारे बाबा चिल्ला चिल्ला कर कह रहे थे की उनके पपीते के पत्ते और एलोवेरा से मलेरिया तो मलेरिया, डेंगू का भी पूरा इलाज किया जा सकता है। उन्होंने इसके समर्थन में कई मरीजों के नाम और जाँच रिपोर्टें भी पेश की थी। लेकिन दुनिया ने नही मानी। नोबल प्राइज कमेटी ने उनके नाम पर विचार तक नही किया। ये हमारी 5000 साल पुरानी संस्कृति को बदनाम करने की साजिश है और इसे बर्दास्त नही किया जा सकता। कोई आदमी पुरानी चीजें खोजे, पुराने इलाज खोजे, पुरानी सभ्यता खोजे और वो भारत से बाहर निकले , इससे बड़ी साजिश और क्या हो सकती है।
                      बाबा रामदेव कितने सालों से विभिन्न बिमारियों का इलाज खोज रहे हैं। ( ठीक है काला धन भी खोज रहे हैं। ) उन्होंने तो आयुर्वेद में एड्स और कैंसर का भी इलाज खोज लिया है। एड्स का इलाज तो अब तक बाकि दुनिया नही खोज पाई है, तो इसके लिए तो हमे नोबल प्राइज दिया ही जा सकता था। यहां तक की बाबा रामदेव ने तो लड़का होने तक की दवाई खोज निकाली लेकिन नाशुक्रे विश्व को बाबा की कदर ही नही है। दुनिया का कोई देश कभी ये खोज पाया की नाखुनो को आपस में रगड़ने से सर पर बाल उग आते हैं, हमने खोजा। एक समय तो ऐसा था जब दफ्तरों में भी लोग कलम और फाइलें छोड़कर नाख़ून रगड़ते रहते थे। इतनी महान और मौलिक खोजों के बाद भी हमे नोबल प्राइज ना दिया जाना साफ तौर पर हमारे खिलाफ साजिश दर्शाता है।
                        हमे इस मुद्दे को सयुंक्त राष्ट्र में उठाना चाहिए। एक सख्त पत्र विदेश मंत्रालय की तरफ से नोबल प्राइज कमेटी को जाना चाहिए जिसमे कहा गया हो की हमारा देश और हमारी भारतीय संस्कृति की रक्षक सरकार ये सब बर्दाश्त नही करेगी। एक पत्र चीन को भी भेजा जाना चाहिए की वो अब हमारे खिलाफ साजिश करना बंद करे। कुछ भी हो हमारी संस्कृति पर इस तरह का हमला ये सरकार बर्दाश्त नही करेगी।
                       उसके बाद दुनिया को सोचना पड़ेगा। उसे अगर नोबल प्राइज नही तो कोई ना कोई दूसरा प्राइज हमारे देश को देना ही पड़ेगा। जैसे वो बाबा रामदेव को बेस्ट मार्केटिंग का प्राइज दे सकते हैं। वैसे भी बेस्ट मार्केटिंग के विश्व स्तरीय पुरुस्कार की दौड़ में हमारे यहां केवल दो ही लोग हैं, एक बाबा रामदेव और दूसरे नरेंद्र मोदी। इस दौड़ में उनके सामने पुरे विश्व में कोई चुनौती नही है। ये पुरुस्कार दोनों को सयुंक्त रूप से भी दिया जा सकता है। आशा है हमारी सरकार इसके लिए गम्भीरता से प्रयास करेगी।