Wednesday, January 4, 2017

एक फरवरी को बजट पर क्या है विपक्ष का विरोध ?

             सरकार ने बजट पेश करने की तारीख को 28 फरवरी से बदल कर 1 फरवरी कर दिया है। सरकार के इस  कदम का पुरे विपक्ष ने विरोध किया है। खासकर जब चुनाव आयोग ने चार फरवरी को चुनाव की तिथि घोषित कर दिया है। सरकार  का कहना है की बजट को चुनाव से नही जोड़ना चाहिए। इस पर विपक्ष का कहना है की चुनाव को बजट से विपक्ष नही सरकार जोड़ रही है। वरना सालों पुराणी परम्परा को बदलने का कोई खास कारण सरकार नही बता पाई। इस पर विपक्ष ने जो सवाल उठाये हैं वो इस तरह हैं। -

१.  चार फरवरी को चुनाव है और दो फरवरी को चुनाव प्रचार बन्द हो जायेगा। इसलिए बजट में लोगों के मुद्दों पर बहस ही नही हो पायेगी। और सरकार बजट की कुछ योजनाओं को लोगों के हित की योजनाओं के रूप में पेश कर सकती है जो सही नही होगा।
२.  चुनाव घोषित होने पर आचार सहिंता लागु हो जाती है, जिसके बाद सरकार ऐसा कोई काम या घोषणा नही कर सकती जो लोगों को लुभाने और द्वारा चुनाव को प्रभावित कर सकती हो। इस सूरत में चुनाव से दो दिन पहले बजट पेश करना एक तरह से चुनाव आचार सहिंता का उलन्घन माना जाना चाहिए।
३.  एक फरवरी को बजट पेश करने पर माकपा नेता सीताराम येचुरी का कहना है की साल का चौथा क्वार्टर एक जनवरी से शुरू होता है और आर्थिक सर्वेक्षण 31 जनवरी को पेश करना पड़ेगा। इस सर्वेक्षण में साल के अंतिम क्वार्टर में नोटबन्दी से हुए नुकशान के आंकड़े शामिल नही होंगे। सरकार नोटबन्दी के नुकशान को लोगों के सामने आने से पहले ही चुनाव और बजट पेश करना चाहती है ताकि जुबानी तौर पर नोटबन्दी को देश और लोगों के हित में होने का गलत प्रचार कर सके।
                        इन सारी चीजों को देखते हुए चुनाव आयोग ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

नोटबंदी का असर - सूरत में जेम्स और ज्वैलरी की प्रदर्शनी " स्पार्कल -2017 " स्थगित।



एक तरह सरकार और वित्तमंत्री दावा कर रहे हैं की नोटबन्दी के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है, वहीं दूसरी तरफ बाजार से जो खबरें आ रही हैं वो कुछ और कहानी कहती हैं। सूरत देश का सबसे बड़ा डायमंड हब है। यहां दिसम्बर में हर साल जेम्स और ज्वैलरी के लिए "स्पार्कल " के नाम से प्रदर्शनी का आयोजन होता था। इस प्रदर्शनी के आयोजक दक्षिण गुजरात चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स और गुजरात सरकार होते थे। इसमें हीरे और आभूषण के व्यवसाय से जुडी कम्पनियां अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करती थी।
                लेकिन इस बार नोटबन्दी के कारण इस प्रदर्शनी में हिस्सा लेने वाली कम्पनियों की तरफ से कोई उत्साह नही दिखाया जा रहा है। पिछले साल हिस्सा लेने वाली कम्पनियों की संख्या 120 थी, लेकिन इस बार 70 से भी कम कम्पनियों ने बुकिंग करवाई। इसलिए अब " स्पार्कल - 2017 " को स्थगित कर दिया गया है। अब इसका आयोजन 20 जनवरी के आसपास होने की सभावना है।