Sunday, February 18, 2018

व्यंग -- PNB का मोदी और हमारा मोदी

शाम का समय, मोहल्ले के चबूतरे पर हम दस बारह लोग बैठे हुए थे। PNB घोटाला चर्चा का विषय था। तभी सामने से शर्माजी आते हुए दिखाई दिए। सब उनका इंतजार करने लगे। शर्माजी PNB में काम करते हैं। शर्माजी ने भी देख लिया। वो भी निपटने की मुद्रा में आ गए। जैसे ही वो नजदीक आये, एक आदमी बोला,
          क्यों शर्माजी, बैंको में कोई नियम कायदा होता है की नहीं ?
          किसी को भी और कितना ही पैसा यूँ आँख बंद करके दे देते हो। दूसरा बोला।
          कोई गारंटी वारंटी भी लेते हो की नहीं ? तीसरा बोला।
          क्या गारंटी ली थी जो इतना पैसा दे दिया ? चौथा बोला।
शर्माजी उखड़ गए। बोले, तुमने क्या गारंटी ली थी जब पूरा देश दे दिया था ?
          क्या मतलब ? चौथा आदमी बोला।
          मतलब क्या ? हमने एक मोदी पर, उसकी बातों पर भरोसा करके पैसे दे दिए। तुमने भी तो एक मोदी पर भरोसा करके पूरा देश दे दिया। क्या वापिस आया अब तक ? शर्माजी बोले।
          वो तो पंद्रह साल से गुजरात चला रहे थे। पूरा मीडिया वहां के विकास के गुण गा रहा था। पहला आदमी बोला।
            तो वो भी इससे ज्यादा साल से कंपनियां चला रहा था पुरे देश में।  और सारे फ़िल्मी एक्टर उसके साथ फोटो खिंचवाने जाते थे। वो भी कोई ऐरा गेरा नहीं था। शर्माजी ने जवाब दिया।
             लेकिन तुमने साल दो साल उसका व्यवहार देख लिया था तो फिर उसके LOU रिवाइज क्यों किये ? एक आदमी ने प्रतिवाद किया।
             तो तुमने भी तो साल दो साल देख लिया था उसके बाद भी विधानसभाओं में उसके LOU रिवाइज क्यों किये ? शर्माजी पूरी तैयारी में थे।
            लेकिन वो तो अभी बाकी कामों को पूरा करने की कह ही रहे हैं। दूसरा आदमी बोला।
             कहने को तो हमारे वाला भी छह महीने में सारा पैसा चुकाने की कह रहा है, तुम्हारे वाला तो 2022 की बात कर रहा है जबकि उसका समय 2019 में खत्म हो रहा है। शर्माजी ने पलटकर  कहा।
अब किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था।
आखिर में हथियार डालते हुए एक आदमी बोला, चलो ये बताओ की रिकवरी के लिए क्या कर रहे हो ?
शर्माजी ने एक लपेटे हुए पोस्टर को खोलकर दिखाया। जिसमे लिखा हुआ था -
                                                       तलाश है नीरव मोदी की
                                               11500 करोड़ बैंक घोटाले के आरोपी
                                 अंतिम बार प्रधानमंत्री मोदीजी के साथ दावोस में देखे गए
            ये क्यों लिख रहे हो। मोदीजी का जिक्र क्यों कर रहे हो। ये तो गलत बात है। एक आदमी ने एतराज किया।
           तो तुम बता दो उसके बाद कहां देखा था वहां का नाम लिख देते हैं। शर्माजी मुस्कुराये।
इतना कह कर शर्माजी आगे चल पड़े और रुक कर बोले, अरे हाँ, तुम चार साल की रिकवरी के लिए क्या कर रहे हो ?

Thursday, February 15, 2018

PNB घोटाले पर सरकार के रुख पर उठते सवाल

                   PNB के 11400 करोड़ के घोटाले पर टीवी पर बहस के दौरान बीजेपी के प्रवक्ता सरफराज आलम ने कहा की ये घोटाला कांग्रेस की देन है और इस पर कांग्रेस को देश से माफ़ी मांगनी चाहिए। उसने ये भी कहा की कांग्रेस के शासन के दौरान पीएमओ से फोन करके बैंको पर दबाव डाल कर बड़े बड़े लोन दिलवाये जाते थे और उनमे कमीशन लिया जाता था।
                     ये आरोप अपनी जिम्मेदारी से पीछा छुड़ाने की नाकाम कोशिश के साथ साथ अपनी भाषा के स्तर पर निहायत घटिया भी है। लेकिन फिर भी अगर इसे सच मान लें, तो भी कुछ सवालों के जवाब बीजेपी को देने ही होंगे। जैसे -
१.  इस तरह कमीशन लेकर दिलवाये गए लोन के अपराध में आपने कितने कांग्रेस नेताओं को पकड़ा ? या आप भी उनसे हिस्से की बात कर रहे थे।
२. हरएक लोन का हर साल नवीनीकरण होता है। इस तरह दिलवाये गए कितने लोन का नवीनीकरण नहीं किया गया ये बात देश को बताइये।
३. अगर PNB के LOU फरवरी 2017 में जारी किये गए तो उनके लिए किसने फोन किया था उसका नाम देश को बताइये।
४. अरुण जेटली ने दावोस के लिए प्रधानमंत्री के साथ गए उद्योगपतियों के समूह के बारे में किये गए ट्वीट में नीरव मोदी का भी नाम है।  ये रिकार्ड की चीज है, तो अब बीजेपी और सरकार उससे इंकार क्यों कर रही है ?
५. RBI के पूर्व निदेशक ने कहा की बैंक का स्विफ्ट SWIFT सिस्टम और CBS सिस्टम finacal आपस में जुड़ा हुआ नहीं था जिसकी वजह से ये घोटाला सम्भव हो सका। सत्यम के केस में भी ठीक यही कहा गया था। फिर इतने दिन तक RBI किस चीज का इंतजार कर रहा था और उसके रैगुलेटर की जिम्मेदारी का क्या मतलब है। अगर उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है तो पुरे देश के आम आदमी का पैसा बैंको के कर्मचारियों के रहमोकरम पर है।
           ये कुछ सवाल हैं जिनका जवाब मौजूदा सरकार और बीजेपी को देना चाहिए और उसे देना होगा।

               इसके अलावा एक चीज देश की जनता को भी समझनी होगी। जिस तरह से ये सरकार अपनी हर विफलता की जिम्मेदारी पिछली कांग्रेसी सरकारों पर और पिछले 70 सालों पर डालती है उससे ये मौका भी आ सकता है। मन लीजिये किसी ताकतवर देश के साथ कोई युद्ध हो जाता है और उसमे देश को नुकशान उठाना पड़ता है तो सरकार का जवाब ये होगा -
               पिछली सरकारों ने अच्छे हथियार नहीं खरीदे, सैनिको को उचित प्रशिक्षण नहीं दिया गया और सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण नहीं हुआ इस लिए हम युद्ध में कामयाब नहीं हुए।
                देश ये सुनने के लिए तैयार रहे।