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Tuesday, January 12, 2016

November IIP DATA -- पटरी से उत्तर रही है विकास की गाड़ी।

          ये सरकार जिस एक चीज का नाम लेकर सत्ता में आई थी वो थी विकास। इस सरकार ने चुनावों के दौरान विकास के बड़े बड़े वायदे किये थे। पुरे देश में मोदीजी ने विकास के गुजरात मॉडल को सभी समस्याओं का हल बताया था। जिन लोगों ने गुजरात को देखा नही था या फिर बीजेपी की नजर से देखा था, वो बहुत उत्साहित थे। मीडिया ने ऐसा माहौल बना दिया था जैसे बीजेपी और नरेंद्र मोदी के आते ही विकास की गाड़ी सरपट दौड़ने लगेगी। कॉर्पोरेट सैक्टर भी कोल् और 2G के सारे अहसान और लूट को भूलकर जो कांग्रेस ने उसको खुली छूट देकर लूटने दिया था, नरेंद्र मोदी के पीछे लामबंद हो गया। लेकिन इस देश की विशेषताओं को समझते हुए कोई सही विकास का मॉडल उसके पास नही था। उसने UPA से जिस अवस्था में गाड़ी संभाली थी उसे वो एक इंच भी आगे नही बढ़ा पाई। आशंका तो ये जाहिर की जा रही हैं की अगर सरकार इन्ही नीतियों पर चलती रही तो देश की गाड़ी गड्ढे में उतर जाएगी।
           आज नवंबर महीने के IIP के आंकड़े घोषित हुए हैं। उनके अनुसार IIP की दर -3. 2 % है। पिछले महीने यही दर जब 9 . 8 % आई थी तो इस सरकार के मंत्रियों ने बहुत जोर जोर से अपनी पीठ थपथपाई थी। इसी ब्लॉग में मैंने तब भी लिखा था की त्योहारों के महीने के आंकड़ों से विकास  अंदाजा नही लगाया जाना चाहिए और कम से कम तीन लगातार महीनो के आंकड़े आने तक इंतजार करना चाहिए। उस समय का विश्लेषण
करते हुए हमने उसको उदाहरण ना मानने के कारण बताये थे। अब नवंबर के आंकड़े उसके आसपास तो दूर, नकारात्मक स्थिति में आ गए हैं। हालाँकि जिस तरह त्योहारों के महीने में अतिरिक्त उत्पादन होता है उसी तरह उसके तुरंत बाद के महीने में उत्पादन में एकदम कमी भी आती है। लेकिन इन आंकड़ों में सबसे ज्यादा चिंता का आंकड़ा है कैपिटल गुड्स में जो -25 % है। किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था में इस मद में एक अच्छी वृद्धि की उम्मीद की जाती है।
                दूसरी चिंता की बात ये है की उपभोक्ता महंगाई की दर बढ़ रही है। जिसमे खाद्य पदार्थों के मामले में ये 6 . 4 % हो गयी है जो वांछित दर से ज्यादा है। इसलिए रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज कम करने की संभावना खत्म हो जाती है।
                   कुल मिलाकर देश के विकास की गाड़ी पटरी से उतर रही है। और दूसरी तरफ इस सरकार का ध्यान लोगों की खरीद शक्ति बढ़ाने के उपाय करने की बजाय बुलेट ट्रेन जैसे अव्यवहारिक प्रोजेक्टों पर है। जिनसे केवल देश पर ब्याज और भुगतान का दबाव ही पैदा होगा।