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Friday, October 28, 2016

एक सैनिक भाई को एक बहन की तरफ से दीपावली की शुभ कामना का पत्र !

                    मेरे प्यारे भाई, मैं ये पत्र दीपावली की शुभ कामनाये देने के लिए लिख रही हूँ। मेरी, बापू की और पुरे गांव की तरफ से तुम्हे और तुम्हारे सभी साथियों को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनायें। मुझे ये पत्र इसलिए लिखना पड़ा क्योंकि प्रधानमंत्रीजी ने सारे देश के लोगों को सैनिकों को दीपावली की शुभकामनायें देने के लिए कहा है। वरना हमारी तो ऐसी कौनसी साँस होगी जिसमे तुम्हारे लिए शुभकामनायें नही होती हों। आशा करती हूँ की ये पत्र तुम्हे मिल जाये और दीपावली से पहले मिल जाये।
                      बापू दस दिन से शहर में बैठे हैं। वरना वो भी अपनी तरफ से पत्र में कुछ जरूर लिखवाते। इस बार धान की फसल खराब हो गयी थी ,लेकिन जो भी और जैसी भी थी उसे बेचने के लिए बापू दस दिन पहले शहर गए थे और अब तक नही आये। काका बता रहे थे की सरकार कोई न कोई बहाना बना कर खरीदने से इंकार कर रही है। पता नही कब बिकेगी और कितने में बिकेगी। माँ की बीमारी में जो कर्जा लिया था उसको वापिस करने का बहुत दबाव है।
                        उम्मीद है तुम तो बिलकुल ठीक ठाक होंगे। और ये भी उम्मीद है की तुम्हारी ड्यूटी देश की रक्षा में ही लगी होगी और किसी सेठ साहूकार के दरवाजे पर नही होगी। किसी अफसर के घर के बर्तन मांजने में भी नही होगी। दो साल पहले जब तुम्हारी ड्यूटी किसी अफसर के घर में बर्तन मांजने की लगी थी और उस अफसर की घरवाली ने तुम्हे थप्पड़ मारा था तो ये बात काका के लड़के ने जब वो छुट्टी आया था तो बापू को बता दी थी। बापू उस दिन बहुत रोया था। वो तो उसी दिन तुम्हारी नोकरी छुड़वाने के लिए जा रहा था लेकिन माँ की बीमारी में पैसो की जरूरत के कारण नही जा पाया।
                     अभी कुछ दिन पहले जब टीवी में ये खबर आयी थी की छत्तीसगढ़ में सैनिको ने ही गांव वालों के घर जला दिए थे और बलात्कार और कत्ल तक किये थे। तब बापू का मुंह खुला का खुला रह गया था। उनको कुछ समझ नही आ रहा था। बहुत देर बाद उनके मुंह से केवल ये निकला की इससे तो बर्तन मांजना ही अच्छा। कई दिन तक बापू ने कम रोटी खाई।
                       अब तो तुम्हारी ड्यूटी सीमा पर ही है ना। मैं तुमसे एक बात कहना चाहती हूँ। टीवी पर बहुत खराब खराब खबरें आ रही हैं। अगर लड़ाई छिड़ जाये तो तुम किसी गांव में आग मत लगाना। तुम तो जानते ही हो अपना दो कमरे का मकान बनाने में बापू की पूरी जिंदगी लग गयी। इसी तरह उन लोगों की लगी होगी। तुम किसी बच्चे पर गोली मत चलाना। बच्चे थोड़ा ना लड़ाई के लिए जिम्मेदार हैं। अगर दुश्मन के सैनिक हमारे यहां इस तरह का काम करें तो तुम उन्हें मार डालना। और अगर दुश्मन के किसी गांव के लोग घर छोड़ कर भाग गए हों तो वहां तुम्हे कुछ बूढ़े और बीमार लोग मिलेंगे, जो घरवालों के साथ भाग नही सके होंगे। तुम उन्हें कुछ खाने के लिए देना और उनसे कहना की उनके रिश्तेदार जल्द वापिस आएंगे। मैं जानती हूँ की तुम कोई गलत काम नही करोगे , लेकिन जब सिर काटने की मांगे हो रही हों तो कुछ भी हो सकता है।
                        हम यहां बैठ कर ये दुआ करेंगे की लड़ाई ना हो। ताकि तुम और तुम्हारे साथी भी दीपावली मना सकें।
                                                                                                              तुम्हारी छोटी बहन
                                                                                                                      गुड्डी