Showing posts with label Prime Minister Modi. Show all posts
Showing posts with label Prime Minister Modi. Show all posts

Friday, October 28, 2016

एक सैनिक भाई को एक बहन की तरफ से दीपावली की शुभ कामना का पत्र !

                    मेरे प्यारे भाई, मैं ये पत्र दीपावली की शुभ कामनाये देने के लिए लिख रही हूँ। मेरी, बापू की और पुरे गांव की तरफ से तुम्हे और तुम्हारे सभी साथियों को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनायें। मुझे ये पत्र इसलिए लिखना पड़ा क्योंकि प्रधानमंत्रीजी ने सारे देश के लोगों को सैनिकों को दीपावली की शुभकामनायें देने के लिए कहा है। वरना हमारी तो ऐसी कौनसी साँस होगी जिसमे तुम्हारे लिए शुभकामनायें नही होती हों। आशा करती हूँ की ये पत्र तुम्हे मिल जाये और दीपावली से पहले मिल जाये।
                      बापू दस दिन से शहर में बैठे हैं। वरना वो भी अपनी तरफ से पत्र में कुछ जरूर लिखवाते। इस बार धान की फसल खराब हो गयी थी ,लेकिन जो भी और जैसी भी थी उसे बेचने के लिए बापू दस दिन पहले शहर गए थे और अब तक नही आये। काका बता रहे थे की सरकार कोई न कोई बहाना बना कर खरीदने से इंकार कर रही है। पता नही कब बिकेगी और कितने में बिकेगी। माँ की बीमारी में जो कर्जा लिया था उसको वापिस करने का बहुत दबाव है।
                        उम्मीद है तुम तो बिलकुल ठीक ठाक होंगे। और ये भी उम्मीद है की तुम्हारी ड्यूटी देश की रक्षा में ही लगी होगी और किसी सेठ साहूकार के दरवाजे पर नही होगी। किसी अफसर के घर के बर्तन मांजने में भी नही होगी। दो साल पहले जब तुम्हारी ड्यूटी किसी अफसर के घर में बर्तन मांजने की लगी थी और उस अफसर की घरवाली ने तुम्हे थप्पड़ मारा था तो ये बात काका के लड़के ने जब वो छुट्टी आया था तो बापू को बता दी थी। बापू उस दिन बहुत रोया था। वो तो उसी दिन तुम्हारी नोकरी छुड़वाने के लिए जा रहा था लेकिन माँ की बीमारी में पैसो की जरूरत के कारण नही जा पाया।
                     अभी कुछ दिन पहले जब टीवी में ये खबर आयी थी की छत्तीसगढ़ में सैनिको ने ही गांव वालों के घर जला दिए थे और बलात्कार और कत्ल तक किये थे। तब बापू का मुंह खुला का खुला रह गया था। उनको कुछ समझ नही आ रहा था। बहुत देर बाद उनके मुंह से केवल ये निकला की इससे तो बर्तन मांजना ही अच्छा। कई दिन तक बापू ने कम रोटी खाई।
                       अब तो तुम्हारी ड्यूटी सीमा पर ही है ना। मैं तुमसे एक बात कहना चाहती हूँ। टीवी पर बहुत खराब खराब खबरें आ रही हैं। अगर लड़ाई छिड़ जाये तो तुम किसी गांव में आग मत लगाना। तुम तो जानते ही हो अपना दो कमरे का मकान बनाने में बापू की पूरी जिंदगी लग गयी। इसी तरह उन लोगों की लगी होगी। तुम किसी बच्चे पर गोली मत चलाना। बच्चे थोड़ा ना लड़ाई के लिए जिम्मेदार हैं। अगर दुश्मन के सैनिक हमारे यहां इस तरह का काम करें तो तुम उन्हें मार डालना। और अगर दुश्मन के किसी गांव के लोग घर छोड़ कर भाग गए हों तो वहां तुम्हे कुछ बूढ़े और बीमार लोग मिलेंगे, जो घरवालों के साथ भाग नही सके होंगे। तुम उन्हें कुछ खाने के लिए देना और उनसे कहना की उनके रिश्तेदार जल्द वापिस आएंगे। मैं जानती हूँ की तुम कोई गलत काम नही करोगे , लेकिन जब सिर काटने की मांगे हो रही हों तो कुछ भी हो सकता है।
                        हम यहां बैठ कर ये दुआ करेंगे की लड़ाई ना हो। ताकि तुम और तुम्हारे साथी भी दीपावली मना सकें।
                                                                                                              तुम्हारी छोटी बहन
                                                                                                                      गुड्डी 

Monday, March 21, 2016

व्यंग -- लो, जिन्हे भगवान समझते थे वो तो भक्त निकले।

                   भक्त बहुत दुखी हैं। दुखी इसलिए की जिन्हे वो अब तक भगवान मानते थे उन्होंने खुद खड़े होकर कह दिया की नही, हम तो केवल भक्त हैं। जो भक्त अब तक भगवान के भक्त थे वो एक दर्जा नीचे आकर एक दूसरे भक्त के भक्त हो गए। डिमोसन हो गया। अभी कल की ही तो बात है जब वेंकैया जी ने उनको भगवान का वरदान और गरीबों का मसीहा बताया था। लेकिन  उन्होंने सबके दिल तोड़ते हुए घोषणा कर दी की वो तो केवल एक भक्त हैं।
                     भगवान कृष्ण ने गीता में मोक्ष की प्राप्ति के लिए जिन रास्तों यानि योग के विभिन्न प्रकारों का वर्णन किया है उनमे उन्होंने कहा है की जो सबसे उच्च श्रेणी के साधक हैं उनके लिए ज्ञान योग है। उन्होंने कहा की ज्ञान योग ही सबसे श्रेष्ठ योग है। विज्ञानं भी यही कहता है की मुक्ति के लिए ज्ञान जरूरी है। भगवान बुद्ध ने भी बुद्धि को गुरु मानने की सलाह दी थी। कृष्ण ने ये भी कहा की ज्ञान योग ही ऐसा योग है जिससे साधक एक पल में मुक्ति का अनुभव कर सकता है। अष्टावक्र ने इस बात की पुष्टि की है। लेकिन इसके साथ ही भगवान कृष्ण ने ये भी कहा है की ये केवल उच्चत्तम श्रेणी के साधकों के लिए है लेकिन आजकल भक्तों की एक श्रेणी ज्ञानयोग के साधको को देशद्रोही घोषित कर सकती है और ज्ञान के मंदिर को देशद्रोहियों का अड्डा बता सकती है।
                   जो उससे नीचे की श्रेणी के साधक हैं और जो सामान्य नागरिक की तरह जीवन व्यतीत करते हैं उनके लिए गीता में कर्मयोग का प्रावधान है। भगवान कृष्ण ने कहा है की मनुष्य कर्म करते हुए भी मुक्ति को प्राप्त हो सकता है अगर वो अपने कर्मो को भगवान को समर्पित कर दे। लेकिन यहां तो ऐसे साधक हैं जो अपने कर्मो को भगवान को समर्पित करना तो दूर, दूसरे के कर्मों को भी अपने नाम पर चढ़ाने में लगे रहते हैं। इसलिए कर्मयोग उनके लिए नही है।
                   इसके बाद भगवान कृष्ण ने निम्नतम स्तर के साधक के लिए भक्ति योग का प्रावधान किया। ये सबसे निचले स्तर के साधक होते हैं। जो ना तो अपने कर्मो की जिम्मेदारी लेते हैं और ना दूसरों के कर्मो को मान्यता देते हैं। इस किस्म के साधक भक्ति योग अपना सकते हैं। इसमें कई सुविधाएँ रहती हैं। भक्त हमेशा ( जब उसका दिल चाहे ) भक्ति में डूबा रह सकता है। वह किसी के प्रति जवाबदेह नही होता। वह भगवान के गुण  दोष नही देखता इसलिए उम्मीद करता है की लोग उसके गुण  दोष भी ना देखें। जब भी जवाब देने का समय आता है वो मोन साध लेता है। जब मोन रहने का समय होता है वो प्रवचन देना शुरू करता है। गीता ने भक्तों के लिए कई प्रकार की सुविधाएँ जाहिर की हैं। भक्त के लिए ये कतई जरूरी नही होता की भगवान के दिखाए रस्ते पर चले। वो उससे बिलकुल उल्ट रास्ते पर भी चल सकता है। जैसे-
                   कोई अम्बेडकर का भक्त हो सकता है बिना इस बात की परवाह किये की उसके घर में दलितों के प्रवेश पर पाबंदी है। जब दलित कुंए से पानी ना भरने देने की गुहार लगा रहे होते हैं तो बाबा साहब का भक्त उन्हें सयम रखने की सलाह दे सकता है। जब महिलाएं मंदिर में प्रवेश की मांग कर रही होती हैं तो वो मुंह फेर सकता है। जब अल्पसंख्यकों को पेड़ से लटकाया जा रहा होता है तो इस्लाम की परम्परा पर भाषण दे सकता है। जब रोहित वेमुला बनाया जा रहा हो तो वो उसे जातिवादी और देशद्रोही बता कर उस पर सहमति दे सकता है। बाबा साहब का भक्त एक ऐसे संगठन का सदस्य हो सकता है और गर्व से हो सकता है जिसका मुखिया ना दलित हो सकता है और ना महिला हो सकती है। भक्त उसकी मूर्ति पर माला चढ़ा सकता है जिसका उसने कल पुतला फूंका था। आज जिसकी हत्या पर मिठाई बांटी हैं कल उसके चरणो में मत्था टेक सकता है। भक्त के लिए सब माफ़ है। भगवान ने कहा है की वो निम्न दर्जे का साधक है। लेकिन चालक भक्त दिखावा भी कर सकता है। हो सकता है उसके दिल में कोई दूसरा देवता बैठा हो और वो माला किसी दूसरे देवता को पहना रहा हो। ऐसा भक्त बाजार का चलन देखकर बोली लगा सकता है। ऐसे भक्त से सावधान रहने की जरूरत है।

Sunday, March 6, 2016

आरएसएस और बीजेपी के देशविरोधी षड्यंत्र

            
  आम लोग कई चीजों पर एकदम निर्णायक नतीजे पर नही पहुंच सकते और इस पर पहुंचने के लिए वो मीडिया द्वारा फैलाई गयी अफवाहों के शिकार हो जाते हैं। पिछले दो साल में जब से ये सरकार सत्ता में आई है इस पर आरएसएस का एजेंडा लागु करने के आरोप लगते रहे हैं। इस दौरान कुछ बड़ी घटनाएँ भी हुई हैं जिनके बारे में भी एक पक्ष का आरोप है की वो कोई अकस्मात घटी हुई घटनाएँ नही हैं, बल्कि एक सोची समझी साजिश के तहत बाकायदा प्लान करके की गयी वारदातें हैं। इन घटनाओं की प्लानिंग का आरोप बीजेपी और आरएसएस के लोगों पर है और मीडिया के एक हिस्से की इसमें साझेदारी है। बीजेपी हमेशा इससे इंकार तो करती रही है लेकिन उसने उन सवालों का जवाब कभी नही दिया जो उस पर उठाये गए। इन घटनाओं में से कुछ का विश्लेषण इस प्रकार है। --
 १.       बिहार चुनाव से पहले दादरी की घटना हुई। इसमें गाय मारने के आरोप में एक व्यक्ति अख़लाक़ की हत्या कर दी गयी। इस घटना में मुख्य आरोपी बीजेपी नेता के पुत्र निकले। असल बात ये है की जिस गाय को मारने के आरोप में भीड़ को भड़का कर ये घटना अंजाम दी गयी वो गाय मरने जैसी कोई घटना वहां हुई ही नही थी। एक झूठी कहानी गढ़कर एक समुदाय के खिलाफ भावनाएं भड़काई  गयी। फिर उसके बाद क्या हुआ ? बीजेपी और आरएसएस के सारे नेता पूरी बहस को इस मुद्दे पर ले आये की गाय को मारना सही है या गलत। पूरी बहस उस चीज पर हो रही थी जो असल में घटनास्थल पर मौजूद ही नही थी। मीडिया का एक हिस्सा पुरे जोर शोर से इसका प्रचार कर रहा था। सोशल मीडिआ में बैठे भाड़े के लोग इसे हवा दे रहे थे। और बीजेपी के सबसे बड़े नेता इस पर चुप्पी साधे  हुए थे यानि उनका मौन समर्थन इस पूरी मुहीम को हासिल था।
२.         अब JNU की घटना को देखिये। छात्रों का एक समूह एक प्रोग्राम का आयोजन करता है जिसका कोई संबंध ना वहां की चुनी हुई स्टूडेंट यूनियन से था  और ना  उसके वामपंथी अध्यक्ष से था। बीजेपी का छात्र संगठन ABVP उस प्रोग्राम से ठीक 15 मिनट पहले वाइस चांसलर से मिलकर उसकी अनुमति रद्द करवा देता है। ABVP के नेता पहले से ही इसकी तैयारी के तहत एक बदनाम न्यूज चैनल के लोगों को वहां बिना अनुमति के बुला कर रखते हैं। उसके बाद प्रोग्राम करने वाले छात्रों और ABVP के सदस्यों में झगड़ा होता है। छात्रसंघ अध्यक्ष उसमे बीच बचाव की कोशिश करता है। इतने में मुंह पर कपड़ा बांधे हुए कुछ लोग देश विरोधी नारे लगाते हैं और निकल भी जाते हैं। बात खत्म हो जाती है। उसके बाद पूरी घटना के विडिओ को छेड़छाड़ करके उसमे बाहर से नारे डाले  जाते हैं। इस काम का आरोप HRD मंत्री स्मृति ईरानी की सहयोगी शिल्पी तिवारी पर आता है। उसके बाद वही न्यूज चैनल उस बदले गए विडिओ को पूरा दिन टीवी पर दिखाता है और पूरी JNU को देशद्रोह के अड्डे में तब्दील कर देता है। उसके बाद बीजेपी के सांसद महेश गिरी देशद्रोह का मामला दर्ज करवाते हैं और पुलिस सरकार के इशारे पर छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लेते हैं। उसके बाद पूरी बीजेपी और आरएसएस लगातार वामपंथ पर देशद्रोह में शामिल होने का राग अलापते हैं। इसके बाद जो चीजें सामने आई वो इस प्रकार हैं।
                १. मीडिया के कुछ चैनलों द्वारा दिखाए गए विडिओ फर्जी थे।
                २. कन्हैया ने इस तरह का कोई नारा नही लगाया इसका कोई विडिओ सबूत पुलिस के पास नही    है।
                ३. मुंह ढंककर नारे लगाने वाला एक भी आदमी पकड़ा नही गया। और शायद ही कभी पकड़ा जाये।
         लेकिन हो क्या रहा है। इस पूरी घटना को इस तरह पेश किया जा रहा है जैसे बीजेपी को छोड़कर सभी विपक्षी पार्टियां, चाहे वो कांग्रेस हो, वामपंथी हों या जनता दल हो सब देशद्रोही हैं। अभी अभी बीजेपी के नेता अरुण झुठली ने भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यक्रम में कहा की कन्हैया भारत के टुकड़े करने के नारे लगा रहे थे और दूसरी तरफ इनकी पुलिस अदालत में कह रही है की उसके पास कोई इसकी कोई विडिओ फुटेज नही है। ये व्ही अरुण झुठली हैं जो दिल्ली चुनाव में एक हाथ में माइक पकड़कर कह रहे थे की आम आदमी पार्टी रंगे हाथ पकड़ी गयी और दूसरे हाथ से उच्च न्यायालय के उस एफिडेविट पर साइन कर रहे थे जिसमे लिखा था की आम आदमी पार्टी के खातों में कोई गड़बड़ी नही पाई गयी।
               अब दूसरा सवाल ये उठता है की क्या ये कोई अलग अलग घटी हुई आकस्मिक घटनाएँ हैं। नही ये बाकायदा एक विचारधारा के आधार पर देश में एक साम्प्रदायिक विभाजन पैदा करने और उसे बनाये रखने की सोची समझी रणनीति है। इस रणनीति में मीडिया का एक हिस्सा जिसके मालिक बीजेपी के नजदीकी उद्योगपति हैं उसकी मदद करता है। इसमें सोशल मीडिया में बैठा एक भाड़े का तबका और कुछ लम्पट किस्म के लोग योगदान करते रहते हैं। देश में ऐसे लोग जिनकी सोचने और समझने की शक्ति कमजोर है वो इस बहाव में बह जाते हैं।

Vyang -- सशक्त महिलाएं और अशक्त उद्योगपति

             पिछले दो सालों में, जब से यह सरकार आई है तब से किसी ने महिला आरक्षण बिल का नाम भी नही सुना। जब बीजेपी की सरकार नही थी तो सुषमा स्वराज बाकि विपक्षी महिला सांसदों के हाथ में हाथ डालकर फोटो उतरवाती थी और महिलाओं के लिए जोशीले भाषण देती थी। लेकिन जब से उनकी सरकार आई है तब से उनकी महिला सांसदों के साथ बोलचाल बंद है। हम लगातार संसद को रोकने के लिए विपक्ष को कोसते देखते हैं और अटके हुए बिलों की सूचि अख़बारों में छपती है। लेकिन उसमे महिला आरक्षण मिल का नाम नही होता। क्योंकि वो बिल राज्य सभा में, जहां विपक्ष का बहुमत है वहां अटका हुआ नही है बल्कि लोकसभा में जहां सरकार के पास पूर्ण बहुमत है वहां अटका हुआ है। और चूँकि बीजेपी इसे पास नही कराना चाहती इसलिए इसका जिक्र नही होता। पहले हम इसे बीजेपी का दोगलापन समझते थे। लेकिन अब हमे महिलाओं  के सम्मेलन में प्रधानमंत्री का भाषण सुनकर ये मालूम हुआ की महिलाएं तो पहले ही सशक्त हैं। उसके बाद से हमे भी ज्ञानबोध हुआ। बीजेपी को ये ज्ञानबोध 18 महीने पहले हो चूका था।
             इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री के ज्ञानपूर्ण भाषण में और भी कई बातें थी जैसे हमे ये भी मालूम पड़ा की महिलाएं घर को बहुत अच्छी तरह चलाती हैं। अब तक हमे और देश को इसका पता नही था। प्रधानमंत्री अपनी पूरी भाषण कला उड़ेल रहे थे और लगातार तालियों का इंतजार कर रहे थे। माननीय सुमित्रा महाजन और माननीय नजमा हेपतुल्ला के चेहरे पर संतोष के भाव थे। इसी भाषण में प्रधानमंत्री ने एक नया रहस्योद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा की व्यवस्था परिवर्तन से कुछ नही होता, बल्कि असल जरूरत है की महिलाएं खुद को बदलें। क्या करें ? आप कह रहे हैं की वो सशक्त हैं, अच्छा घर चलाती हैं और टेक्नोलॉजी का प्रयोग बेहतर ढंग से करती हैं। फिर किस बदलाव की जरूरत है ? महिलाएं अशक्त हो जाएँ या अच्छा घर चलाना बंद कर दें या तकनीक को भूल जाएँ। खैर इस पर ABVP के छात्र शोध करेंगे। लेकिन हमे ये मालूम हो गया की महिला आरक्षण बिल क्यों नही आ रहा। क्योंकि उसकी जरूरत ही नही है। अब भी जो लोग उसका इंतजार या उम्मीद करेंगे उनको तो पागल ही कहा जा सकता है।
              फिर इस देश में अशक्त कौन हैं भाई जिनके लिए काम करने की जरूरत है। वो हैं बेचारे उद्योगपति। ये निरीह किस्म के प्राणी आजकल बहुत मुश्किल में हैं। क्या आपको इनकी दुर्दशा के आंकड़े मालूम हैं। नही ना। मैं बताता हूँ। देश का ये तबका जिसमे कुल मिलाकर एक प्रतिशत लोग शामिल हैं वो देश की कुल सम्पत्ति के 50 प्रतिशत के मालिक हैं। केवल 50 प्रतिशत के। कितनी शर्म की बात है।  देश की पूरी आधी सम्पत्ति के मालिक ये गए गुजरे 99 प्रतिशत लोग हैं। अगर देश की आधी सम्पत्ति देश का ये गरीब गुरबा दबा कर रखेगा तो हो चूका विकास। इसलिए सरकार का पहला कर्तव्य है इस बेशकीमती सम्पत्ति को इनके कब्जे से मुक्त करवाना ताकि देश का विकास हो सके और इन बेचारे निरीह उद्योगपतियों को कुछ राहत मिल सके। इसके लिए सरकार ने प्रोविडेंट फंड पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा तो उसका विरोध हो गया, इन उद्योगपतियों ने मजबूरी में कुछ बैंकों का कर्ज नही लौटाया तो उस पर सवाल उठ रहे हैं, सरकार इनके लिए भूमि अधिग्रहण बिल लेकर आई तो उसको पास नही होने दिया और अब GST बिल को लटका कर बैठे हैं। सारा देश ही देशद्रोही हो गया है किसी को देश के विकास की चिंता ही नही है। बेचारी सरकार अकेली क्या करे ?
             

Tuesday, February 9, 2016

Vyang -- क्या एक ही परिवार काम नही करने दे रहा ?

खबरी -- प्रधानमंत्री मोदी ने कहा  है की एक परिवार सरकार को काम नही करने दे रहा है।

गप्पी -- इससे एक बात तो साफ हो गयी की काम नही हो रहा है। अब तक विपक्ष ये आरोप लगाता था की कुछ काम नही हो रहा है। तब सरकार कहती थी की नही, बहुत काम हो रहा है। उसके बाद धीरे धीरे ऐसा कहने वाले लोगों की तादाद बढ़ती गयी जो कहते हैं की काम नही हो रहा है। आखिर में सरकार ने मान ही लिया की हाँ, काम नही हो रहा है। लेकिन उसने तुरंत ये भी जोड़ दिया की काम इसलिए नही हो रहा है की एक परिवार है जो सरकार को काम नही करने दे रहा है। सरकार तो बहुत काम करना चाहती है लेकिन क्या करे, मजबूर है। नरेंद्र मोदी और बीजेपी अब तक मनमोहन सिंह पर ये आरोप लगाते रहे थे की वो एक परिवार की मर्जी के खिलाफ कुछ भी नही कर सकते। उन्हें रबर स्टाम्प तक कह  दिया जाता था। अब देश को ये मालूम पड़ा की केवल मनमोहन सिंह नही, नरेंद्र मोदी भी उस परिवार की मर्जी के खिलाफ कुछ नही कर सकते, ऐसा खुद मोदी कह रहे हैं। इस परिवार की महिमा तो अपरम्पार है।
                 ऐसा नही है की मोदी जी ने ये बात ऐसे ही कह दी हो। उन्होंने इस बात के सबूत भी दिए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया की जिस GST बिल को खुद उन्होंने 8 साल तक पास नही होने दिया, उसी बिल को अब ये परिवार पास नही होने दे रहा है। उन्हें इस पर गहरी नाराजगी है की संसद को रोकने का विशेषाधिकार तो केवल उनके पास है, कोई दूसरी पार्टी ऐसा कैसे कर सकती है। मुझे लगता है की अगर इसी तरह चलता रहा तो ऐसा ना हो की जनता उन्हें वापिस उसी भूमिका में  ला दे। तब वो खम ठोककर कह सकते हैं की हाँ, अब हम रोकेंगे संसद और बिलों को।
           क्यों रोकोगे भाई ?
           क्योंकि संसद और बिलों को रोकना लोकतंत्र का हिस्सा है, ये विपक्ष का अधिकार है।
          तो अब जो विपक्ष  कर रहा है वो क्या है ?
           वो देश विरोधी और विकास विरोधी काम है।
खैर, एक दूसरा तबका भी है जो एक दूसरे परिवार पर काम ना करने देने का आरोप  लगा रहा है। ये परिवार है संघ परिवार। सारे देश के लेखक और कलाकार कह रहे हैं की उनके काम करने का माहौल खत्म हो रहा है। दलितों से लेकर छात्रों तक और महिलाओं से लेकर किसानो तक सभी इस पर आरोप लगा रहे हैं। लेकिन बीजेपी और प्रधानमंत्री इसे मानने को तैयार नही हैं। अल्पसंख्यकों की तो ये हालत है की उन्होंने तो  शिकायत तक करना बंद कर दिया है। इस परिवार ने सरकार को कह दिया है की उसके दफ्तर में जो पुरानी, रंग उतरी हुई, खोखले सिर वाली जो मूर्तियां रखी हुई हैं उन्हें शिक्षा संस्थानों में ऊँची जगहों पर रख दिया जाये। अब स्मृति ईरानी जगह ढूंढ ढूंढ कर इन्हे विश्व विद्यालयों के शो केस में सजा रही हैं।
               कुछ परिवार और भी हैं जिनके बारे में लोग जानते हैं की देश में जो भी होता है और जो भी नही होता है, वो सब इनके कारण है। ये देश के शाश्वत परिवार हैं। कौन सरकार है और कौन विपक्ष है, इन्हे कुछ फर्क नही पड़ता है। इनमे अम्बानी परिवार है, अडानी परिवार है, टाटा-बिरला परिवार हैं और भी कई नाम हैं। लेकिन इनकी एक खाशियत है। ये हमेशा देश की गिरती हुई विकास दर को लेकर रोते रहते हैं। शोर मचाते रहते हैं। इनके कारण देश के बैंक डूबने के कगार पर पहुंच गए हैं। इनकी हालत बहुत ही खराब है। नौकरी की इंतजार करता हुआ युवा अपनी चिंता छोड़कर इनके लिए कैंडल मार्च निकालता रहता है। अपने माँ-बाप को गलियां देता रहता है। मुहल्ले के छोटे दुकानदार का लड़का सोशल मीडिया पर लिखता है रिटेल में FDI का विरोध करने वाले दुकानदार गद्दार हैं। मजदूर का लड़का कहता है की अगर श्रम कानूनों को नही बदला गया तो निवेश कैसे आएगा। किसान का लड़का कहता है की अगर खाद की सब्सिडी खत्म नही की गयी राजस्व घाटा कैसे कम होगा। देश का भविष्य इन युवाओं के हाथों में सुरक्षित है। और इस सारे रुदन के बीच इन परिवारों की सम्पत्ति बढ़ती जाती है।
                 इनके अलावा भी कुछ परिवार हैं जो हमारे लोकतंत्र की रीढ़ की हड्डी हैं। जैसे मुलायम सिंह का परिवार, शिवराज सिंह चौहान का परिवार, शुष्मा स्वराज का परिवार, लालू प्रशाद यादव का परिवार, रमन सिंह का परिवार आदि आदि। इनका काम होता रहता है। इनका विकास तेज गति से चलता है भले ही उसके किये संसद ना चले। इनका नाम लेना गुनाह है। आप लेकर देखिये, गेट पर सुब्रमणियम स्वामी डण्डा ( नोटिस ) लेकर बैठे हैं।
              अब कौन परिवार काम नही करने दे रहा इस पर अलग अलग राय हैं। इसलिए एक परिवार का रोना रोना गलत है।

Monday, January 25, 2016

Vyang -- गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर दिल्ली में टहलना

                 आज गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या है। इस दिन महामहिम राष्ट्रपति महोदय राष्ट्र के नाम सन्देश देते हैं। ये राष्ट्र कौन है और कहां रहता है ये मुझे कभी पता नही रहा। सो ये सोचकर की ये अपना काम नही है मैं महामहिम का सम्बोधन छोड़कर दिल्ली में टहलने निकल पड़ा।
                   अभी कुछ ही दूर चला था की एक आदमी मुझे मिला। उसने मुझसे पूछा की कहां जा रहा हूँ तो मैंने बता दिया की दिल्ली घूमने का विचार है यूं ही टहलते टहलते। तो उसने उत्सुकता से कहा की भैया अगर यमुना जी की तरफ जाओ तो वहां एक नजर डाल लेना और गणतंत्र दिख जाये तो मुझे फोन कर देना।
                    लेकिन गणतंत्र यमुना जी के किनारे क्योँ मिलेगा ? मैंने पूछा।
                 अब क्या बताएं भईया। गणतंत्र दिवस से ठीक दो दिन पहले केंद्र कैबिनेट ने अरुणाचल प्रदेश में चुनी हुई राज्य सरकार को बर्खास्त करके राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी। उस समय से गणतंत्र को लग रहा है की इन लोगों के हाथों से मरने से तो अच्छा है की आत्महत्या ही कर लूँ। और घर छोड़कर चला गया। अब मेरा दिल बहुत घबरा रहा है।
                  तो तुम पुलिस में रिपोर्ट क्यों नही करते ? मैंने पूछा।
               उसने एक खिसियानी सी हंसी हंसी और बोला की गया था भैय्या , लेकिन दरोगा ने कहा की तुम्हे दिखाई नही देता की 26 जनवरी के लिए कितनी तैयारियां करनी पड़ रही हैं। ऐसे समय में हम देश की सुरक्षा को छोड़कर इन ऐरे-गैरों को ढूंढते फिरें ? चलो भागो।
              ठीक है मैं ध्यान रखूँगा, मैंने कहा और पहले यमुना जी के घाट पर ही जा पंहुंचा।
             वहां घाट से कुछ दुरी पर कुछ मजदूर यमुना जी के किनारे पर पड़ा कचरा साफ कर रहे थे। एक बड़ी सी गाड़ी के पास एक मोटा सा आदमी शानदार कपड़े पहने खड़ा हुआ था। गाड़ी के अंदर डैशबोर्ड पर छोटा सा लेकिन खूबसूरत नया तिरंगा लगा हुआ था। मैंने उस झण्डे को ध्यान से देखने की कोशिश की तो उसने मुझे टोका।
                क्या देख रहे हो भाई साहब ? कल गणतंत्र दिवस है। इस दिन हमारे देश को आजादी मिली थी। सो हर देश भक्त को अपनी गाड़ी पर तिरंगा लगाना चाहिए। मैं तो हर साल लगाता हूँ।
                  और जिसके पास गाड़ी ना हो वो क्या करें अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए ? उन मजदूरों की तरह के लोग। मैंने सफाई करते मजदूरों कि तरफ इशारा किया।
                  वो हँसा , उनको तो ये भी पता नही होगा की कल गणतंत्र दिवस है। ये तो देश पर बोझ हैं बोझ। वैसे भी इनके झण्डा लगाने ना लगाने से क्या फर्क पड़ता है ? उसने हाथ में पकड़ी हुई लिम्का की बोतल खत्म की और यमुना में उछाल दी। फिर उसने मेरी तरफ देख कर पूछा की तुम यहां क्या कर रहे हो ?
                कुछ नही , किसी ने मुझे कहा था की गणतंत्र आत्महत्या करने निकला है सो मैं उसे यमुना जी के किनारे ढूंढने की कोशिश करूँ।
                  ये सब गए गुजरे लोग हैं जो आत्महत्या करके देश को बदनाम करते हैं। अब किसानो को ही देख लो, कायर कहीं के। काम धंधा तो करते नही हैं और निकल पड़ते हैं आत्महत्या करने के लिए, ताकि टीवी में नाम आ जाये। लेकिन इससे देश की कितनी बदनामी होती है इसका अंदाजा भी है उनको।  उसने गहरी नाराजगी प्रकट की।
                   तो आपका मतलब है किसान टीवी में नाम आने के लिए आत्महत्या करते हैं ? मैंने आश्चर्य से बाहर आने की कोशिश की।
                   वरना क्या वजह है ? आप नही करते, मैं नही करता। अगर कोई दूसरा कारण होता तो आप और हम भी करते। खैर, उधर ढूंढो ! उसने कुछ भिखारियों के टोले की तरफ इशारा किया।
                  मेरा मन किया की मैं भी आत्महत्या कर ही लूँ। परन्तु मैं वहां से निकल गया। आगे एक पान वाले की दुकान पर खड़ा हो गया। उसकी दुकान के टीवी में पद्म पुरस्कार मिलने वालों के नाम की घोषणा हो रही थी। उसमे नाम बोले जा रहे थे, अनुपम खेर, मधुर भंडारकर, मालिनी वगैरा वगैरा। मुझे लगा ये पद्म पुरस्कारों की बजाए सहिष्णुता के मामले पर निकाले गए सरकारी जलूस में भाग लेने वालों की कमेंट्री की जा रही है। तभी एक आदमी ने कहा की इसमें बाबा रामदेव का नाम क्यों नही है ?
                वहां खड़े एक दूसरे आदमी ने उसका जवाब देते हुए कहा की बाबा रामदेव को नोबल पुरस्कार की लिस्ट में रखा गया है। नोबल पुरस्कार मिलने के बाद उनको सीधा भारत रतन दिया जायेगा।
                प्रश्न करने वाला संतुष्ट नजर आया। उसके बाद मुलायम सिंह यादव का माफीनामा आया बाबरी मस्जिद तोड़ने के दौरान हुई कार्यवाही में कारसेवकों की मौत पर अफ़सोस व्यक्त करते हुए।
                मुझे लगा मुलायम सिंह थोड़ा लेट हो गए वरना पद्म पुरस्कारों की लिस्ट में उनका भी नाम हो सकता था। उसके बाद फ़्रांसिसी राष्ट्रपति होलांदे और प्रधानमंत्री मोदी की चंडीगढ़ के रॉक गार्डन में उतारी गयी कुछ फोटो दिखाई गयी। फोटो ठीक उसी अंदाज में थी जिसमे युवा जोड़े अजीबोगरीब पोज बनाकर और लड़की लड़के के पीछे खड़ी होकर कन्धे पर हाथ रखकर उतरवाते हैं। मुझे शर्म आई और मैं दूसरी तरफ देखने लगा। टीवी देखते वक्त मुझे दिन में करीब बीस बार ऐसा करना पड़ता है जब कोई घर की महिला सदस्य या अगली पीढ़ी के लोग साथ बैठें हों।
                  उसके बाद खबर दी गयी की अगले पांच राज्यों में होने वाले चुनावो में भी हार की जिम्मेदारी लेने के लिए अमित शाह को ही चुना गया है। किस्मत अपनी अपनी।
                  उसके बाद नेताजी से जुडी हुई फाइलों में शामिल एक पत्र का नमूना दिखाया गया जिसमे जवाहरलाल नेहरू द्वारा नेताजी सुभाष चन्द्र बॉस को युद्ध अपराधी कहने का जिक्र था। उस पत्र में जितनी भाषाई और तथ्यगत गलतियां हैं उतनी गलतियां तो दसवीं तक पढ़ा लिखा कोई आदमी भी नही करता। और ये पत्र उस जवाहरलाल नेहरू के नाम से दिखाया जा रहा है जिसकी लिखी हुई किताबें अंग्रेजी और विश्व साहित्य में क्लासिक का दर्जा रखती हैं। मुझे लगा नेहरू आज जिन्दा होते तो जरूर आत्महत्या कर लेते।
                मेरी बर्दाश्त की हद आ गयी थी सो मैं घर की तरफ लौट पड़ा।

Monday, December 14, 2015

Comment on News -- प्रधानमंत्री, एयरपोर्ट और मूडीज की रिपोर्ट ( Prime Minister, Airport and Moody,s Report )

अभी अभी मूडीज की रिपोर्ट आई है। उसमे भारत की रेटिंग को बरकरार रखते हुए  "स्थिर आउटलुक " दिया गया है। उसके साथ ही इंडोनेशिया , थाईलैंड , सिंगापुर , मलेशिया और फिलीपींस को " पॉज़िटिव आउटलुक " दिया गया है। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री जी और पूरी बीजेपी शोर मचा रहे हैं की पूरी दुनिया हमारी तरफ देख रही है। केवल हम ही दुनिया में सबसे आकर्षक निवेश स्थान हैं। लेकिन मूडीज की रिपोर्ट इसकी पुष्टि नही करती। भक्तों को ये बात बुरी लग सकती है।
             जब हमारे देश के प्रधानमंत्री विदेश जाते हैं तो वहां के लिए कुछ तोहफे ले जाते हैं। वहां के प्रधानमंत्री और दूसरे लोग भी हमारे प्रधानमंत्री को तोहफे देते हैं। ये एक सामान्य शिष्टाचार है जो पूरी दुनिया में होता है। इन तोहफों में हमारे देश की कोई कलाकृति , कोई शाल या हाथ की बनाई हुई वस्तुएं होती हैं जो किसी ना किसी रूप में हमारी संस्कृति से जुडी होती हैं।
               लेकिन अभी अभी ये पता चला है की प्रधानमंत्री अपनी सिंगापुर यात्रा के दौरान हमारे देश के मुनाफे में चलते हुए दो एयरपोर्ट सिंगापुर की एक कम्पनी को तोहफे में दे आये।

Thursday, November 19, 2015

COMMENT ON NEWS -- ओबामा, मोदी और मुलायम सिंह यादव

खबरी -- ओबामा ने कहा है की रूस को सीरिया में असद और legitimate सरकार में से एक को चुनना होगा। 

गप्पी -- सीरिया में राष्ट्रपति असद की सरकार के खिलाफ लड़ने वाले अमेरिका और पश्चिमी देशों से समर्थन प्राप्त विद्रोही वहां चुनाव में भाग लेने से इंकार करते हैं। उनका कहना है की बिना किसी चुनाव के सीरिया की सरकार को उनके हवाले कर दिया जाये। क्योंकि विद्रोही और अमेरिका दोनों जानते हैं की उन्हें लोगों का समर्थन प्राप्त नही है। अमेरिका को सीरिया में भी लीबिया, इराक और यमन की तरह एक Legitimate सरकार चाहिए।

खबरी -- उत्तरप्रदेश में भी बिहार की तरह महागठबंधन की बात चल रही है।

गप्पी -- लेकिन ये गठबंधन किस-किसके बीच हो सकता है अभी इस पर स्थिति साफ नही है। बिहार चुनाव में मुलायम सिंह द्वारा बीजेपी समर्थक स्टैंड लिए जाने के बाद दादरी की घटना पर मुलायम सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस करके कहा था की उनकी सरकार ने तीन ऐसे लोगों की पहचान कर ली है जो दादरी और मुजफ्फर नगर , दोनों जगह दंगे करवाने के लिए जिम्मेदार हैं, और इन लोगों पर कार्यवाही की जाएगी भले ही उनकी सरकार क्यों ना चली जाये। उसके बाद हमेशा की तरह मुलायम सिंह यादव चददर तान कर सो गए और लोग अभी भी कार्यवाही का इंतजार कर रहे हैं। इसलिए लगातार खत्म होती साख के बाद मुलायम के नेतृत्व में कोई गठबंधन बन सकता है इसमें लोगों को शक है।

खबरी -- प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है की विविधता हमारी ताकत है। 

गप्पी -- मोदी जी कई बार इस तरह के बयान देते रहते हैं जो उनकी पार्टी और आरएसएस की गतिविधियों से मेल नही खाते। अगर विविधता को आप ताकत मानते हैं तो इसे खत्म करने के प्रयास क्यों कर रहे हैं। मोदी जी की साख भी केवल बयानों से बहाल होने वाली नही है। उन्हें भी इसके लिए कार्यवाही करनी होगी।

Wednesday, October 28, 2015

बिहार में बीजेपी को वोट ना देने के 10 कारण

बिहार चुनाव में बिहार की जनता को बीजेपी को वोट क्यों नही देना चाहिए, इसके मुख्य दस कारण निम्नलिखित हैं।
१.  लोकसभा चुनाव में किये गए मोदी जी के वायदों को पूरा नही करना।
२.  देश में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने का विरोध ।
३.  पुरे देश में साहित्यकारों के खिलाफ हमले और दुष्प्रचार।
४.  पुरे देश में उच्च शिक्षा के छात्रों के खिलाफ दमन चक्र।
५.  देश में बढ़ती हुई महंगाई के विरोध में।
६.   रेल व दूसरी सरकारी सेवाओं में आम जनता की लूट के खिलाफ।
७.  शिक्षा सहित सभी महत्त्वपूर्ण संस्थाओं में संघ के अक्षम लोगों की नियुक्तियां।
८.  विदेशो में सरकारी यात्राओं के दौरान विपक्ष पर हमलों का विरोध।
९   दिल्ली सहित विपक्षी राज्य सरकारों को काम ना करने देने के लिए।
१०. जनहित की सभी योजनाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थय, मनरेगा और बच्चों के बजट में कटौती के विरोध में।

                हालाँकि इस तरह के कारणों की लिस्ट कहीं लम्बी है, फिर भी ये वो कारण हैं जिन पर पुरे देश के सही सोच वाले लोग दुखी हैं।

Monday, October 19, 2015

NEWS -- महामहिम राष्ट्रपति जी और मोदी जी क्या चाहते हैं ?

खबरी -- राष्ट्रपति महोदय का एक नया बयान आया है।

गप्पी -- मुझे ये बहुत गड़बड़ की बात लग रही है। प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं की राष्ट्रपति जी ने रास्ता दिखाया है और उनकी ही बात सुनिए। और राष्ट्रपति महोदय ने कहा है की बाँटने वाली ताकतों को हराइये।  देश को बाँटने वाली ताकतों को हराना ही होगा। अब सारा देश देख रहा है की ये ताकतें कौनसी हैं। पूरा लेखक समुदाय इनके खिलाफ उठ खड़ा हुआ है। साथ ही बिहार में चुनाव हो रहे हैं। इन चुनाओं में मोदी जी सचमुच क्या चाहते हैं ये बहुत कन्फ्यूजन की बात है।

Sunday, October 18, 2015

NEWS -- प्रधानमंत्री की नाराजगी पर मीडिया झूठ बोल रहा है ?

खबरी -- क्या वाकई में प्रधानमंत्री बीफ पर आये बयानों से नाराज हैं ?

गप्पी -- मुझे लगता है की मीडिया बेवजह इस बात को प्रचारित कर रहा है। क्योंकि --
क्या प्रधानमंत्रीजी का कोई बयान आया है ?
नही।
क्या प्रधानमंत्रीजी ने कोई ट्वीट किया है ?
नही।
क्या बीजेपी का कोई बयान आया है ?
नही।
क्या बुलाये गए नेताओं ने ऐसा कहा है ?
नही।
क्या प्रधानमंत्रीजी या अमित शाह ने कोई सार्वजनिक लताड़ लगाई है ?
नही।
तो फिर मीडिया को कैसे पता ?

NEWS -- बीफ बयान पर अमित शाह की बैठक

खबरी -- सुना है बीफ बयान पर प्रधानमंत्री नाराज हैं और अमित शाह ने बयान देने वाले नेताओं को तलब किया है ?

गप्पी -- मुझे नही लगता की प्रधानमंत्री नाराज हैं। अब तक खुद अमित शाह और प्रधानमंत्री बिहार में बीफ पर जोर शोर से बयान दे रहे थे। बिहार में ही गिरिराज सिंह बीफ के सवाल पर जहर उगलते रहे हैं उन्हें तो अमित शाह ने नही रोका। लगता है की बीजेपी को महसूस हो रहा है की बीफ के मामले से फायदा होने की बजाय नुकशान हो रहा है इसलिए वो अपनी स्ट्रैटजी बदल रही है। वरना इन नेताओं पर कार्यवाही हो जाती।

Friday, October 9, 2015

प्रधानमंत्री जी का भाषण और मुद्दे

एक भक्त -- प्रधानमंत्री जी आज खूब बोले।
आम आदमी -- किस पर, महंगाई पर ?
भक्त -- नही लेकिन……।
आदमी -- तो भृष्टाचार पर ?
भक्त -- नही वो मेरा मतलब।।।।।।।।।।।।।।।।।।
आदमी -- तो फिर काले धन पर बोले होंगे ?
भक्त --     वो बिहार में -------
आदमी -- ओह, तो युवाओं के रोजगार पर बोले होंगे ?
भक्त --    नही लेकिन  वो --------- .
आदमी --  तो क्या देश में सूखे के हालत पर बोले ?
भक्त  --   उस पर नही , वो तो -------
आदमी --  तो क्या किसानो की आत्महत्याओं पर बोले ?
भक्त  --  नही यार -------
आदमी -- तो फिर किस पर बोले ?
भक्त  --   वो बीफ पर।
 आदमी --   बीफ पर क्या बोले ?
भक्त   --   बोले, मेरा मतलब है उन्होंने कहा की बीफ नही खाना चाहिए , मेरा मतलब है हिन्दुओं को नही खाना चाहिए , उनका मतलब था यदुवंशियों को नही खाना चाहिए  और पुरे देश में किसी को नही खाना चाहिए लेकिन गोवा में चलेगा और जम्मू कश्मीर में जो सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है उसका स्वागत करते हैं लेकिन किसी विधायक को नही खाना चाहिए और की ये की मतलब है बीफ का निर्यात किया जा सकता है लेकिन गायों को नही मारना चाहिए , लेकिन सरकार बीफ निर्यात पर सब्सिडी देगी वो सही है लेकिन बकरीद पर बकरों को नही मारना चाहिए और की बकरीद के बिना बकरे मारे जा सकते हैं और की सरकार चाहती है की सब मिलजुल कर रहें और कहीं दंगा या हत्या होती है तो उसे भूलकर आगे बढ़ना चाहिए और की ---पता नही।

Tuesday, October 6, 2015

Vyang -- हम देश को जलाकर उसका विकास करेंगे।

                 हमने देश के विकास के नए तरीके निकाले हैं। हम पहले पुरे देश में आग लगाएंगे, बस्तियां जलाएंगे , लोगों को मारेंगे, उनके बीच नफरत की दिवार खड़ी करेंगे और फिर पुरे देश का विकास करेंगे। जब लोग आपस में एक दूसरे से नफरत करेंगे और आपस में बात भी नही करेंगे तब भूमि अधिग्रहण जैसे  कानूनो का विकास होगा क्योंकि लोग इकट्ठे नही हो सकते। फिर चाहे हम जमीन अडानी को दें या अम्बानी को कोई सवाल नही करेगा। क्योंकि आधे लोगों को डरा दिया जायेगा और बहुत से लोगों के बच्चे जेल में होंगे और वो उन्हें बाहर निकलवाने के लिए रोज हमारे यहां चककर लगाएंगे। उनकी हिम्मत हम पर सवाल उठाने की रह ही नही जाएगी।
                     जब चुनाव शुरू होता है तो लोग रोजगार की बात करते हैं, बिजली और पानी की बात करते हैं। स्कूलों की कमी की बात करते हैं। धीरे धीरे हम उन्हें गाय की बात पर ले आते हैं। दलितों को बता देते हैं की भूख कोई बड़ा मुद्दा नही है, मुद्दा है की अगर यादव सत्ता में आ गए तो उनका क्या होगा। यादवों को बता देते हैं की ये रोजगार वगैरा तो चलता रहता है, ये देखो की गाय की इज्जत कौन कौन नही करता है। ( हमारे अलावा )
महादलितों को कहते हैं की एक बार जितनराम मांझी के बेइज्जती का बदला ले लो, बाद में मनरेगा के लिए हमारे पास आना, हम सोचेंगे।
                  हमने नोजवानो को कह दिया है की हमने लोकसभा चुनाव में क्या-क्या वायदे किये थे ये भूल जाओ और देखो को प्रधानमंत्री की जुकेरबर्ग के साथ फोटो कितनी अच्छी आई है। तुम केवल ये देखो की हम कितनी बेशर्मी से पलटी मार सकते हैं। जब हमने केन्द्रीय विद्यालयों से जर्मन भाषा हटाकर संस्कृत लागु की थी तब हमने संस्कृत और संस्कृति पर कितने अच्छे भाषण दिए थे। शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी को तो ये भाषण रात रात भर जागकर रटवाए गए थे। लेकिन अब जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल के कहने पर हमने दुबारा जर्मन भाषा लागु कर दी तो जर्मन भाषा के योगदान पर हमारे भाषण पढ़ो, कितने अच्छे दिए हैं।
                     आप हमारे मंत्रियों का चुनाव और कामकाज देख सकते हो। हमने बिना पढ़ी-लिखी स्मृति ईरानी को शिक्षा मंत्री बना दिया, महेश शर्मा को संस्कृति मंत्री बना दिया भले ही उन्हें संस्कृति की परिभाषा भी मालूम न हो, गृह मंत्री राजनाथ सिंह अपने गृह दिल्ली को ही देख रहे हैं, जब भी LG कमजोर पड़ते दीखते हैं वो तुरंत स्टेज पर आ जाते हैं। अभी अभी उन्होंने सभी राज्यों को अडवाइजरी जारी की है, भले ही लोगों का ये कहना हो की अडवाइजरी की जरूरत तो केवल संघ मुख्यालय को ही थी।
                     लोग कहते हैं की प्रधानमंत्री नही बोल रहे। लेकिन हम पूछते हैं की प्रधानमंत्री ने अब तक बोलने अलावा और क्या किया है। जहां तक दादरी की घटना का सवाल है तो उसका आकलन चुनावो के बाद होगा की उससे हमे बिहार में कितना फायदा हुआ है। उस आकलन के बाद प्रधानमंत्री निर्णय करेंगे की उस पर क्या कहना है। हम पुरे देश को आग में झोँक रहे हैं लेकिन आपको ये विश्वास दिलाते हैं की आपका घर नही जलेगा। इस देश जलाने की कार्यवाही में जो नौजवान शामिल हो रहे हैं और जेल जा रहे हैं उन्हें हम शहीद का दर्जा देंगे और अपने बच्चों को चुनाव में टिकट देंगे।
                   इसलिए हमारी बिहार की जनता से अपील है की वो इस कार्यवाही में हमारा साथ दे। ये भूख बेकारी के बेकार सवाल भूल जाये और देश जलाने में योगदान करे। वैसे आपको एक बात बता देते हैं की चुनाव में हमारा एजेंडा विकास ही है।

Sunday, October 4, 2015

दादरी की घटना के बाद के संकेत

दादरी के घटना के बाद का जो घटना कर्म है और उससे जो संकेत मिलते हैं वो इस प्रकार हैं।
१.  दादरी की घटना और उससे पहले के साम्प्रदायिक दंगों से समाज ने कोई सबक नही सीखा।
२.  दंगों की राजनीती करने वालों को आज भी दंगे भीड़ आसानी से उपलब्ध है।
३. उत्तर प्रदेश की सरकार इसको रोकने की बजाय इसका राजनितिक फायदा उठाने की कोशिश में है। उसने अरविन्द केजरीवाल जैसे लोगों को तो बिसाहड़ा गांव में जाने से रोकने की कोशिश की लेकिन मुश्लिम विरोधी ब्यानो के लिए कुख्यात महेश शर्मा और ओवैसी को रोकने की कोई कोशिश नही की। यहां तक की मुजफ्फरनगर दंगों के अभियुक्त संगीत सोम को तो वहां धारा 144 के बावजूद सभा को भी सम्बोधित करने दिया।
४. बीजेपी और आरएसएस का नंगा चेहरा फिर सामने आ गया। लालकिले से भाषण देने वाले प्रधानमंत्री ने मौका आने पर मुंह में दही जमा ली और बीजेपी की तरफ से वहां जो लोग गए उनमे से एक कुख्यात मुस्लिम विरोधी महेश शर्मा थे और दूसरे मुजफ्फरनगर दंगों के अभियुक्त संगीत सोम थे। संगीत सोम ने वहां फिर व्ही जहर भरे बयान दिए। उन्होंने कहा की या तो " कानून कानून की तरह काम करे वरना हम इसका जवाब देने में सक्षम हैं पहले की तरह।" इससे साफ जाहिर है की बीजेपी इस घटना को साम्प्रदायिक धुर्वीकरण के लिए इस्तेमाल कर रही है।
५.  देश का हिन्दू समाज एक बार फिर साम्प्रदायिक राजनीती के चारे की तरह इस्तेमाल हो गया। पता नही वो बार बार कुल्हाड़ी पर पैर क्यों मारता है। दसियों युवाओं का जीवन इस राजनीती ने फिर बर्बाद कर दिया। जिस मुस्लिम का कत्ल हुआ उसका तो परिवार बर्बाद हुआ ही , जिन युवाओं को अपनी जिंदगी के बेहतरीन साल सलाखों के पीछे गुजारने पड़ेंगे और जिन पर कातिल होने का कलंक लग गया उनके परिवार भी तो बर्बाद ही हो गए। हिन्दू समाज इस सच्चाई को कब समझेगा।

Thursday, October 1, 2015

विजय गोयल, गांधी, मोदी और महाराष्ट्र के किसान

खबरी -- दिल्ली बीजेपी के नेता विजय गोयल ने महात्मा गांधी के साथ मोदी की तुलना का आधार बताते हुए कहा है की दोनों ही साबरमती से आते हैं। 

गुप्पी -- मुझे डर है की इस आधार पर कोई मोदी की तुलना भगवान राम से ना कर दे की दोनों ने अपनी पत्नी को त्याग दिया था। 

खबरी -- महाराष्ट्र सरकार ने सुखा पीड़ित किसानो को मदद के नाम पर पट्रोल और डीजल दो रूपये महंगा कर दिया। 

गप्पी -- अब महाराष्ट्र के किसानो को डीजल पम्प और ट्रैक्टर के लिए दो रूपये डीजल महंगा खरीदना पड़ेगा। मोदी जी ने बिहार के लिए सवा लाख करोड़ का पैकेज दे दिया और महाराष्ट्र के किसानो को भूखा मरने के लिए छोड़ दिया। क्योंकि अब वहां तो इलेक्शन पांच साल बाद होंगे।

Monday, September 28, 2015

Vyang -- डिजिटल इंडिया ( Digital India ) के फायदे

मुझे ये समझ में नही आ रहा की अब तक हमारे देश ने डिजिटल इंडिया के फायदों को क्यों नही समझा। अब जाकर हमे मालूम पड़ा है की भारत की सारी समस्याओं का समाधान तो डिजिटली हो सकता था तो फिर पिछली सरकारें दूसरी चीजों पर क्यों समय खराब करती रही। खैर देर आयद, दुरुस्त आयद। अब हम इस बात को समझ चुके हैं और जो नासमझ अब भी नही समझ पा रहे हैं उनको समझाने के लिए डिजिटल इंडिया के ये फायदे लिखने पड  रहे हैं।

                               १.  अब आपको जो  समस्या हो उसका समाधान आप डिजिटल इंडिया से कर सकते हैं। आप को किसी विभाग से कोई शिकायत है तो आपको शिकायत करने के लिए विभाग के दफ्तर जाने की कोई जरूरत नही है। आप उस विभाग की वेब साईट पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। आपको तुरंत आपका शिकायत नंबर मिलेगा। आप दो चार दिन के बाद उस नंबर से आपकी शिकायत की स्थिति देख सकते हैं। वहां आपको लगभग 15 दिन तो अंडर प्रोसेस लिखा मिलेगा और आपकी उम्मीद जिन्दा रहेगी। उसके बाद आपको जवाब मिलेगा की आपकी शिकायत संबंधित अधिकारी को भेज दी गयी है। शिकायत को अधिकारी तक पहुंचाने का जो काम डाक विभाग तीन दिन में करता था वो डिजिटली 15 दिन में हो जायेगा। उसके बाद आप जब स्थिति चैक करेंगे तो उसमे  " सॉल्व " लिखा आएगा। आप कुछ नही कर सकते। आप वेब साईट पर दिए गए फोन से इस बारे में जानकारी चाहेंगे तो जवाब आएगा की ये फोन नंबर उपलब्ध नही है। क्योंकि नई व्यवस्था में पुरानी परम्परा का पूरा ध्यान रखा गया है। वेब साईट बेसक इसी साल बनी है लेकिन उसमे टेलीफोन नंबर 10 साल पुराने दिए गए हैं। इस तरह आप डिजिटली अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं। जब साईट पर सॉल्व लिखा है तो आपको भी मान लेना चाहिए की समस्या सॉल्व हो चुकी है।

                               २. इसी डिजिटल इंडिया से देश के किसानो की समस्याओं का भी समाधान हो सकेगा। जिस किसान के यहां 20 मन आलू पैदा हुआ है वो गूगल पर सर्च कर सकता है की दुनिया के कौनसे देश में आलू की कीमत ज्यादा है। मान लो उसे पता चलता है की स्वीडन में आलू महंगा है तो वह अपने आलू को स्वीडन में बेच सकता है। गूगल द्वारा ही उसे एक्सपोर्ट लाइसेंस से लेकर बंदरगाह जैसी हर जानकारी मिल सकती है। जो किसान अब तक रो रहा था की आलू दो रूपये किलो भी नही बिक रहा है वो अब 200 रूपये किलो आलू बेच सकता है। इससे हमारे यहां किसान क्रान्ति हो जाएगी। अभी कुछ दिन पहले इसी तरह की कितनी क्रांतियाँ हमारे देश में हो चुकी हैं इसका जिक्र प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में किया ही था। इस तरह किसान पूरी दुनिया की मंडियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है। उसने जो जनधन योजना में खाता खुलवा लिया था और उसमे भले ही एक रुपया ना डाला हो परन्तु वो नेट बैंकिंग से अपना बैलेंस चैक कर सकता है उसे इसके लिए पांच रूपये खर्च करके शहर जाने की जरूरत नही है वो गांव के साइबर कैफे में ये सेवा 20 रूपये घंटे के खर्चे पर प्राप्त कर सकता है। वरना वो ऑनलाइन सामान बेचने वाली साईट पर जाकर कम कीमत में कम्प्यूटर खरीद सकता है।

                                   ३. मजदूरों को भी इससे काफी लाभ होगा। जिस मजदूर के पास काम नही है वो गूगल पर सर्च कर सकता है की देश में कहाँ काम मिल सकता है। वो मनरेगा का भुगतान नही हुआ हो तो ऑनलाइन शिकायत कर सकता है लेकिन उसका तरीका वही होगा जो हमने ऊपर बताया है।

                                  ४. आपका बच्चा खो गया हो तो आप गूगल पर सर्च कर सकते हैं। किसी महिला के साथ बलात्कार हुआ हो और पुलिस कार्यवाही नही कर रही है तो वो बलात्कारी के साथ सेल्फ़ी लेकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर सकती है। आपके नल में पानी नही आ रहा है तो भी आप गूगल पर सर्च करके पता लगा सकते हैं की कहां  तक पहुंचा। आपके यहां सुखा पड़ा है तो आप इंटरनेट पर पता लगा सकते हैं की आपके इलाके में कितने प्रतिशत बारिस कम हुई है। इसी तरह आपके बच्चे को स्कुल में एडमिशन नही मिल रहा है तो आप पता लगा सकते हैं की हमारे देश में स्कूलों और विद्यार्थिओं का अनुपात क्या है। इस तरह पुरे देश की समस्या हल हो सकती हैं। इंटरनेट पर हर चीज का इलाज मौजूद है।

                                    ५. इसका सबसे बड़ा फायदा ये है की आपको भले ही ये लगता हो की आपकी जिंदगी मुस्किल हो गयी है और सरकार काम नही कर रही है परन्तु आप टीवी पर प्रायोजित भीड़ को प्रधानमंत्री के नारे लगाते देख सकते हैं। आपके मुहल्ले के लोग सरकार के बारे में क्या राय रखते हैं उसकी बजाए आप ये देख सकते हैं की जुकेरबर्ग सरकार के बारे में क्या कह रहे हैं। आपकी राय कोई अमरीकियों की राय से ज्यादा वजन तो नही रखती। प्रधानमंत्री अपने ऊपर लगे आरोपों के बारे में संसद की बजाय विदेश में जाकर लोगों से पूछ सकते हैं की ए मेरे देश के लोगो, बताओ, क्या मेरे ऊपर कोई आरोप है ? अगर किसी ने गलती से भी कह दिया की है, तो इवेंट मैनेजमेंट कम्पनी का भुगतान रोक दिया जायेगा।

                                        ६. इस तकनीक का एक फायदा और है। प्रधानमंत्री डिजिटल तकनीक का उपयोग करके अंग्रेजी में फर्राटेदार भाषण पढ़ सकते हैं और किसी को मालूम भी नही पड़ेगा। आप खुश हो सकते हैं की प्रधानमंत्री कितनी अच्छी अंग्रेजी बोलते हैं। इससे आपके मन में और विदेशों में हमारे देश का रुतबा बढ़ता है। वैसे भी प्रधानमंत्री कह रहे हैं की पूरी दुनिया हमारा लोहा मान रही है इसलिए भले ही हमारा बनाया हुआ लोहा मार्किट में ना बिके हमे उसकी चिंता करने की जरूरत नही है।

                                   बस अब हम केवल गूगल पर ये सर्च कर रहे हैं की क्या भारत में होने वाले इलेक्सन में अमेरिकी वोट डाल सकते हैं ? एक बार इसका जवाब हाँ में मिल जाये फिर लोग लोकतंत्र, समाजवाद , समानता, भाईचारा, नागरिक अधिकार जैसी चीजों को गूगल पर ढूंढते ही रहेंगे।