Monday, March 6, 2017

नए बैंक चार्जिज ( Bank Charges ) से बचने के उपाय।

                   सरकार ने नोटबन्दी के बाद लोगों को इसके लिए मजबूर किया की वो अपने खर्चे चलाने के लिए नकद की बजाय डिज़िटल पेमेन्ट करें। उसके बाद डिज़िटल पेमेन्ट का प्लेटफार्म उपलब्ध करवाने वाली कम्पनियों ने इसका इस्तेमाल करने वालों पर कई तरह के चार्ज लगा दिए। उसके बाद अब बैंको ने भी छोटे ग्राहकों पर बैंक से लेनदेन करने पर कई तरह के चार्ज लगाने की घोषणा कर दी। बैंको में सामान्य आदमी जो सेविंग खाता रखता है और जो कर्मचारी सैलरी खाता रखते हैं, ये नए चार्ज उन पर लागू होंगे। एक तरफ सरकार ने कानून बना कर सैलरी को केवल बैंक में ट्रांसफर करने का आदेश जारी कर दिया और दूसरी तरफ बैंको ने उन खातों पर चार्ज लगाने की घोषणा कर दी। दूसरी तरफ सरकार ने आम आदमी को मिलने वाली हर तरह की सब्सिडी और सहायता के लिए बैंक खाता होने की शर्त लगा दी और बैंको ने उन पर चार्ज लगा दिया।
                     बड़े कॉरपोरेट घरानों द्वारा कर्जा न चुकाने के चलते बैंको को जो घाटा हो रहा है उसे पूरा करने के लिए उन्हें आम आदमी की जेब काटने की छूट दे दी गयी। पहले तेल कम्पनियों को, उसके बाद रेल मंत्रालय को और  बैंको को ये छूट मुहैया करवा दी गयी है।  गरीबों के लिए काम करने वाली सरकार के फैसले हैं।
                    इसलिए लोगों को अब थोड़ा ध्यान से लेन देन करने की जरूरत है। बैंको ने ये चार्ज दो तरह से लगाए हैं। 

१.    बैंक में बचत खाता और सैलरी खाता धारकों को अब खाते में मिनिमम बैलेंस न रखने पर चार्ज लगेगा। 

२.     बैंक से पैसे निकालने, पैसे जमा करवाने और एटीएम  इस्तेमाल करने पर चार्ज लगेगा। 

                     इससे बचने के लिए कुछ चीजों का ध्यान रखने की जरूरत है। जैसे -

१.    सैलरी खाता धारक अपने खाते से सीधे कटने वाली होमलोन या व्हीकल लोन इत्यादि की किस्तों और दूसरी सीधी पेमेन्ट होने वाली रकम को छोड़कर बाकी पैसा एक ही बार में बैंक से निकाल लें। इस पैसे को घर पर रखें और बाकी महीने का खर्च चलायें। ये पैसा सीधे बैंक से चैक के द्वारा निकालें, क्योंकि एटीएम की लिमिट कम होती है और उससे एक बार में सारा पैसा नही निकाला जा सकता है। 
२.     बचत खाता धारक अपने बैंक खाते का कम से कम उपयोग करें। उसमे बार बार पैसे जमा करवाने और निकालने से बचें। 
३.    नकद की बजाय डिज़िटल पेमेंट करने पर आपको कभी भी किसी न किसी तरह का चार्ज लग सकता है। इसलिए छोटे लेनदेन के लिए नकदी का इस्तेमाल करें और बड़े लेनदेन के लिए चैक का इस्तेमाल करें। 

Thursday, March 2, 2017

राष्ट्रवाद पर अरुण जेटली

खबरी -- राष्ट्रवाद पर आज आये अरुण जेटली के बयान पर क्या कहना है ?

गप्पी -- अरुण जेटली ने कहा है की राष्ट्रवाद कोई खराब शब्द नही है, और केवल भारत में ही इसे गलत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
              इस पर पहली बात तो ये है की पूरी दुनिया के मानवतावादी और जाने माने और प्रगतिशील लोग राष्ट्रवाद के बारे में कोई अच्छी राय नही रखते। इस पर हजारों लेख और टिप्पणियां मौजूद हैं और ये कोई भारत का सवाल नही है।
              दूसरे, इसे जो लोग प्रयोग करते हैं उनकी मंशा पर इसका अर्थ निर्भर करता है। कोई देश आजादी की लड़ाई में अपने देशवासियों को शामिल करने के लिए इसका प्रयोग कर सकता है , तो कोई इसे किसी हमलावर देश के खिलाफ लोगों को एकजुट करने के लिए राष्ट्रवाद शब्द का प्रयोग करता है।
                लेकिन हालात तब बिगड़ते हैं जब लोगों का कोई समूह अपने ही देश के लोगों के दूसरे समूह को गद्दार और देशविरोधी साबित करने के लिए राष्ट्रवाद शब्द का प्रयोग करता है , जैसा की आरएसएस और बीजेपी कर रहे हैं। ये लोग अपने हिसाब से राष्ट्रवाद की परिभाषा तय करते हैं और उसे दूसरों पर थोपते हैं। इस प्रयास में राष्ट्रवाद शब्द न केवल विभाजनकारी भूमिका निभाता है, बल्कि एक समुदाय के खिलाफ अत्याचार और जुल्म का पर्यायवाची बन जाता है। इस तरह के प्रयोग जर्मनी से लेकर अरब तक और अफ्रीका से लेकर भारत तक होते रहे हैं। इसलिए बुद्धिजीवी इसके दुरूपयोग की सम्भावनाओ को ध्यान में रखते हुए इसे बहुत अच्छा नही मानते।
                 लेकिन अरुण जेटली इस बात को जिस मौजूदा विवाद के सन्दर्भ में उठा रहे हैं उसमे क्या वो बताएंगे की क्या आजादी खराब शब्द है जिस पर आरएसएस और बीजेपी इतना हो-हल्ला मचाये हुए है ?