Showing posts with label BJP Akali alliance. Show all posts
Showing posts with label BJP Akali alliance. Show all posts

Monday, October 21, 2019

व्यंग - रहिये पानीदार अब पाकिस्तान के पानी से।

               बहुत पहले रहीम ने कहा था ,
रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून,
पानी गए न ऊबरै, माटी, मानुस, चून।
लेकिन लोगों में पानी नहीं बचा। जिन लोगों पर पानी का इंतजाम करने का जिम्मा था, उनमे तो बिलकुल ही नहीं बचा। इसलिए सब जगह पानी की लिए त्राहिमाम मचा हुआ है।
इसी बीच प्रधानमंत्री ने घोषणा कर दी की पाकिस्तान से पानी लाएंगे। मीडिया ने नदियां बहा दी जिससे कुछ जगहों में दुबारा बाढ़ आ गयी। बिना मौसम की बाढ़। लोगों को समझ नहीं आ रहा। अरे भाई ये प्रधानमंत्री और मीडिया की लाई हुई बाढ़ है जो कभी भी आ सकती है।
लोग उत्साहित हैं। अब पानी आएगा भले ही पाकिस्तान से आये। एक बूढ़े आदमी ने तो अपने लड़कों को बुलाकर साफ साफ कह दिया की उनके मुंह में गंगाजल की जगह पाकिस्तान का पानी डाला जाये। पहले दो पानी मशहूर थे, एक गंगाजल और दूसरा आबे जमजम। अब तीसरा भी मशहूर हो गया , पाकिस्तान का पानी। किसी भी चीज की कीमत उसके उत्पादन पर होने वाली मेहनत और जोखिम पर आधारित होती है, इस हिसाब से हिंदुस्तान में सबसे कीमती पानी पाकिस्तान का पानी ही हो सकता है।
तो ये पानी मिलेगा कहाँ ?
इसे आप अमेज़ॉन या फ्लिपकार्ट से खरीद सकते हैं। होम डिलीवरी की सुविधा के साथ। अगर आपको भुगतान की परेशानी है तो किस्तें भी बनवा सकते हैं। इससे व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे। नए रोजगार पैदा होंगे। अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का कितना आसान रास्ता निकल आया। फालतू में अभिजीत बैनर्जी को नोबल पकड़ा दिया जबकि उसका असली हकदार तो कोई और था।
लेकिन ये पानी आएगा कैसे ? बातचीत से ? शटअप। जब तक आतंकवाद बंद नहीं होता तुम  बातचीत का सोच भी कैसे सकते हो ? जब तक पाकिस्तान से ज्यादा बड़ा इमोशनल मुद्दा दूसरा नहीं मिल जाता बातचीत की कोई संभावना नहीं है। मतलब इसकी कोई संभावना ही नहीं है।
फिर कैसे आएगा पानी ? आएगा और जरूर आएगा। प्रधानमंत्री इसे उसी तरह लाएंगे जैसे प्रोमेथियस स्वर्ग से अग्नि लेकर आया था। प्रधानमंत्री अपने देश के लोगों के लिए कुछ भी कर सकते हैं ट्रम्प के लिए चुनाव प्रचार तक। लेकिन इसमें दो समस्या हैं। पहली ये की कैमरामैन कैसे जायेगा ? अगर कैमरामैन नहीं जायेगा तो प्रधानमंत्री भी नहीं जायेंगे। प्रधानमंत्री तो बिना कैमरामैन के बीच से कचरा तक नहीं उठाते फिर पाकिस्तान से पानी लाने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। दूसरी समस्या ये है की किसी ने उन्हें बता दिया की प्रोमेथियस को दी गयी सजा के तौर पर जब गिद्ध उनका मांस नोच रहा था तो लोग हंस रहे थे। कितने नाशुक्रे लोग हैं, अच्छा है की हमने लोगों के लिए कुछ नहीं किया वरना ये हम पर भी हँसते। अब तो हम इन पर हँसते हैं।
तो फिर कैसे आएगा पानी ?
प्रधानमंत्री की अध्यक्ष्ता में कैबिनेट की मीटिंग में इस पर चर्चा हुई।
सर समस्या ये नहीं है की पानी कैसे आएगा, समस्या ये है की पानी हरियाणा में कैसे आएगा ? क्योंकि पाकिस्तान और हरियाणा के बीच में पंजाब पड़ता है जो पानी को हरियाणा जाने नहीं देगा। पहले भी अकाली एक नहर को रेत से भर चुके हैं।
सर हमे अकालियों को साफ साफ कह देना चाहिए की पानी को हरियाणा जाने दें।
हूँ, लेकिन जब तक अकाली हमारे सहयोगी हैं तब तक प्रकाश सिंह बादल नेल्सन मंडेला हैं, जिस दिन वो हमसे अलग होंगे उस दिन वो भी वैसा ही लुटेरा परिवार हो जायेंगे जैसे बाकि राज्यों में हुआ। लेकिन तब तक कोई दूसरा रास्ता निकालो।
अब अमित शाह ने बोलना शुरू किया तो बाकि लोग पहले ही उनके समर्थन में सर हिलाने लगे।  अमित शाह ने कहा की पंजाब और हरियाणा दोनों को मिलाकर एक केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दो। मैं उससे पहले सबको उठवा लेता हूँ। मीडिया को आदेश दे देते हैं की पाकिस्तान पंजाब में ड्रोन भेज रहा था और हमारे पास पक्की खुफ़िआ सूचना है की वो इन  ड्रोन में परमाणु बम भेजने वाला था।
नहीं, अभी कश्मीर का मामला भी नहीं सुलझा है और मुझे महीने में बीस दिन विदेश में रहना होता है, वहां बहुत मुश्किल होती है।
तभी किसी ने याद दिलाया की हरियाणा का चुनाव तो निपट चुका है अब इस पर माथा पच्ची करने की क्या जरूरत है।
और हम फिर बेपानी रह गए।

Saturday, March 11, 2017

सभी पांच राज्यों में सत्ताधारी पार्टियों की हार।

                 कल सम्पन्न हुए पांच राज्यों के परिणामो से ये बात साबित हुई है की सभी राज्यों में शासन करने वाली पार्टियां हार गयी हैं। इन परिणामो को मीडिया और कुछ दूसरे लोग इस तरह पेश कर रहे हैं जैसे पुरे देश ने नरेंद्र मोदी और बीजेपी के एजेंडे को स्वीकार कर लिया है। कॉरपोरेट मीडिया के सरकार के साथ अपने हित जुड़े हैं और मीडिया समूह के मालिकों के अपने हित जुड़े हैं। इसलिए हमारा कॉरपोरेट लूट में बड़ी छूट पाने के लिए बहुत पहले से नरेन्द्र मोदी का समर्थन करता रहा है। इसलिए मीडिया की हिस्सेदारी ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में बीजेपी की जीत को थोड़ा और शानदार बना दिया है। लेकिन ये बात किसी भी तरह से सही नही है की नरेन्द्र मोदी और बीजेपी के एजेंडे को पुरे देश ने स्वीकार कर लिया है। अगर ये बात सही है तो ऐसा कहने वाले मीडिया और उसमे बैठे विशेषज्ञों को कुछ सवालों के जवाब देने होंगे। जैसे -

१.  मीडिया बताये की गोवा और पंजाब में जहां बीजेपी और उसकी सहयोगियों की सरकारें थी, वहां वो क्यों हारे ?

२.  हर राज्य में बीजेपी को दूसरे दलों के नेताओं को शामिल करने की जरूरत क्यों पड़ती है ? अगर लोग केवल मोदीजी के साथ हैं तो वो उन बीजेपी के कार्यकर्ताओं को टिकट क्यों नही देते जो सालों से पार्टी के लिए काम तो करते हैं लेकिन बहुत जाने पहचाने नही हैं ?

३. गोवा को बीजेपी अपनी मॉडल स्टेट के रूप में प्रस्तुत करती रही है, वहां उसके मुख्यमंत्री भी हार गए।  ऐसा क्यों हुआ ?

                   इसलिए इन चुनाव परिणामो को उसके सही परिपेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। अगर सत्ता विरोधी ये लहर इसी तरह चलती रही तो गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान में बीजेपी को लेने के देने पड़ सकते हैं। जहां पहले किये गए वायदों का हिसाब बीजेपी को देना है। गुजरात के पिछले चुनावो में गरीबों को दस लाख घर देने का वायदा हवा में ही है।

Sunday, February 14, 2016

वामपन्थ पर हमला और संघी राष्ट्रवाद

            JNU की घटना और उसके बाद संघ और बीजेपी सहित सरकार समेत उसके सभी अंग वामपंथ पर टूट पड़े हैं। इनमे वामपंथ को देशद्रोही साबित करने की होड़ लग गयी है। JNU की घटना में वामपंथी छात्र संगठनो की भूमिका को एकतरफा तरीके से दिखाने की कोशिशों के बावजूद, इस बात को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है की ये सारी कवायद बीजेपी सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में आरएसएस के एजेंडे के अनुसार भगवाकरण करने के प्रयास और पुरे देश में वामपंथी छात्र संगठनो के नेतृत्त्व में उसके बढ़ते हुए विरोध के बाद शुरू हुए हैं। शिक्षा को आम आदमी की पहुंच से बाहर करने की कोशिश में लगातार बढ़ाई जा रही फ़ीस, शोध के क्षेत्र में स्कॉलरशिप खत्म किये जाने, और तीसरे दर्जे के लोगों को, जो संघ की विचारधारा के नजदीक हैं, उन्हें शिक्षा संस्थानों में नियुक्त किये जाने का इन संगठनो ने भारी विरोध किया था। इस बार इस विरोध में उनके साथ दलित छात्रों के संगठन और अल्पसंख्यकों के छात्र संगठनो का भी समर्थन था और बीजेपी के लिए इसे आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा था।
              लेकिन इस सबके बावजूद राष्ट्रवाद की ठेकेदारी करने वाले इन संघी संगठनो और वामपंथी संगठनो के पिछले रिकार्ड पर भी एक नजर डालना बेहतर  होगा।
                पंजाब में जब आतंकवाद अपने शिखर पर था और देश की एकता और अखण्डता को चुनौती दे रहा था तब उसके विरोध में कौन खड़ा था। वामपंथी पार्टियों के 200 से ज्यादा नेता इसमें शहीद हुए थे लेकिन उन्होंने अंत तक उसका मुकाबला किया था। बीजेपी बताये की उसके कितने और किस किस नेता ने क़ुरबानी दी थी ? उस समय अकाली दल ने संसद भवन के गेट पर भारत के संविधान की प्रति जलाई थी। उसके बाद से ही अकाली दल और बीजेपी सहयोगी दल हैं।
               बीजेपी हमेशा कश्मीर के मुद्दे को उठाती रही है। लेकिन उसका योगदान वहां आतंकवाद से लड़ने में क्या है ? बीजेपी और उसके अनुपम खेर जैसे समर्थक एक नाम नही बता सकते जिसने कश्मीर में आतंकवाद से लड़ते हुए जान दी हो। हाँ, कश्मीर के नाम पर कमाई जरूर की है फिर चाहे वो सरकार में हिस्सेदारी का मामला हो या पद्म पुरस्कारों का। दूसरी तरफ कश्मीर में सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद युसूफ तारिगामी पर आतंकवादियों के दस से ज्यादा हमले हुए हैं और इन हमलों में उसके 15 से ज्यादा परिवार के सदस्य मारे गए हैं। लेकिन उसने कश्मीर नही छोड़ा और अब भी वहीं है। इस तरह के कई उदाहरण हैं।
                आजादी से पहले तो संघ का रिकार्ड ही अंग्रेजों के सहयोगी का रहा है। लेकिन कुछ तथ्य हैं जिनका आम जनता को नही पता। आजादी से पहले आज की बीजेपी के आराध्य नेता श्यामा प्रशाद मुखर्जी हिन्दू महासभा के नेता होते थे। 1940 में जब जिन्नाह की मुस्लिम लीग ने अलग पाकिस्तान की मांग का प्रस्ताव पास किया, उसके बाद जिन्ना और मुस्लिम लीग का हर कदम पाकिस्तान की तरफ बढ़ रहा था। आजादी से पहले जब अंग्रेज राज के तहत स्थानीय शासन के लिए विधान सभाओं के चुनाव हुए थे उसमे इसी हिन्दू महासभा ने कांग्रेस का विरोध करते हुए मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। हैरत है की इन सारे तथ्यों के बावजूद आज राष्ट्रवाद की ठेकेदारी संघ और बीजेपी कर रही हैं।
                  आज भी मौजूदा समय में संघ और बीजेपी के राष्ट्रवाद और देश प्रेम का एक नमूना मैं यहां देना चाहता हूँ। भारत के लगभग 30 बड़े उद्योगपति, आम जनता के खून पसीने की कमाई का एक लाख चौदह हजार करोड़ रुपया दबा कर बैठ गए। बीजेपी सरकार ने बैंको को इस पैसे की उघराणी करने की बजाए इसे माफ़ कर देने को कहा। बैंको ने ये सारा कर्जा माफ़ कर दिया जबकि इन लोगों के पास लाखों करोड़ की सम्पत्ति है। इसके बाद इन उद्योगपतियों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने की बजाए, बीजेपी सरकार ने इस साल उनमे से दो लोगों को पदमश्री दे दिया। लोगों की मेहनत की कमाई को चर जाने का इनाम। संघ और बीजेपी के राष्ट्रवाद का यही तरीका है। ये रकम पुरे देश के आदिवासियों को पिछले पांच साल में दिए गए बजट प्रावधान से ज्यादा होती है। अब अगर कोई आदिवासी इस पर सवाल  करेगा तो उसे आराम से नक्सली घोषित करके मारा जा सकता है।
                    सरकार के इस काम में अज्ञानी और धर्मान्ध लोगों का एक तबका सहयोग करता है। साथ में कुछ टीवी चैनल, ( जो या तो सीधे तौर पर इस फायदा प्राप्त उद्योगपतियों के होते हैं या फिर उन्हें विज्ञापन के बड़े लाभ दिए जा रहे होते हैं। राज्य सभा की सीट और पद्म पुरस्कार अलग से ) इसमें लगातार सरकारी प्रचार में लगे रहते हैं।
             सवाल ये है की क्या बीजेपी और संघ, वामपंथ पर हमला करके शिक्षा के भगवाकरण और व्यापारीकरण में कामयाब हो जायेगा। या फिर लोग इसे जनतन्त्र पर हमला मान कर विफल कर देंगे।