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Wednesday, August 10, 2016

देश मजे से डूब रहा है।

खबरी -- आजकल देश का क्या हाल चाल है ?

गप्पी -- देश एकदम मजे में है। बस कुछ दलित प्रदर्शन कर रहे हैं, कर्मचारी और मजदूर हड़ताल की तैयारी कर रहे हैं, कश्मीर में कर्फ्यू लगा हुआ है, आदिवासी विरोध यात्रा निकाल रहे हैं, मुस्लिम डरे हुए हैं और जो कल तक प्रधानमंत्री को हिन्दू हृदय सम्राट बताते थे वो उन्हें गद्दार कह रहे हैं। वरना सब ठीक ठाक है। सबका साथ और सबका विकास हो रहा है।

खबरी -- लेकिन लोगों को सरकार के विकास के दावे पर भरोसा क्यों नही हो रहा है ?

गप्पी -- पिछले एक साल में अदानी की सम्पत्ति में 25000 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। फिर भी किसी को भरोसा नही है तो इसमें सरकार बेचारी क्या कर सकती है।

खबरी -- ये आप पार्टी के सांसद मान का क्या मामला है ? सुना है अकाली और बीजेपी के सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को कोई चिट्ठी लिखी है ?

गप्पी -- आम आदमी पार्टी और देश के कई लोग कह रहे थे की पंजाब में नशे की समस्या बहुत बड़ी हो गयी है तो अकाली और बीजेपी इसे पंजाब को बदनाम करने की साजिश कहते थे। अब इस घटना से उन्होंने खुद ही स्वीकार कर लिया की सचमुच पंजाब में नशे की समस्या बहुत गहरी है।

खबरी -- लेकिन इस सब के बावजूद भारत में लोकतंत्र की मजबूती को तो मानना पड़ेगा।

गप्पी -- बिल्कुल, देखो ना जो GST बिल भारी विरोध के कारण 12 साल अटका रहा , उसमे बिना किसी सैद्धान्तिक बदलाव के भी उसके खिलाफ एक भी वोट नही पड़ा। जब दुष्परिणाम सामने आएंगे तो फिर एक दूसरे पर इल्जाम लगाने का एक नया सिलसिला शुरू होगा। ये हमारे लोकतंत्र की मजबूती का ही तो सबूत है।

Friday, March 4, 2016

Vyang -- देश को खूबसूरत बनाने के लिए सेना की जरूरत।

                हम पर ये आरोप लगाना गलत है की हम हर मामले में सेना और सैनिकों के सम्मान को घसीट रहे हैं। जो लोग ऐसा कहते हैं, दरअसल वो लोग देश के प्रति हमारी सोच को समझते ही नही हैं। इसलिए मैं आज यहां इस बात को साफ कर देना चाहता हूँ।
                  हम मानते हैं की हमारा देश खूबसूरत होना चाहिए। इसलिए देश के लोग, उसकी जमीन और उसका सबकुछ खूबसूरत होना चाहिए। इसलिए हम कश्मीर को भारत में बनाये रखने के हित में हैं। जहां तक कश्मीर के लोगों का सवाल है, वो चाहें तो यहां रह सकते हैं वरना पाकिस्तान जा सकते हैं। कश्मीर को भारत के साथ रखने के लिए हमे वहां के लोगों की जरूरत नही है। उसके लिए हमारे पास सेना है। हम ये भी मानते हैं की कश्मीर का जो हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है वो भी भारत में होना चाहिए। हम पाकिस्तान के साथ इस बात पर समझौता कर सकते हैं की वो अपने कब्जे वाले कश्मीर की जमीन हमे लौटा दे, भले ही वहां के लोगों को अपने पास रख ले। लोग तो हम हमारे कब्जे वाले कश्मीर से भी उसको दे सकते हैं।
                 उसी तरह हमारा मानना है की छत्तीसगढ़ और झारखंड इत्यादि में जो जंगल और खदाने हैं, वो खूबसूरत होनी चाहियें। वहां अभी बहुत बड़ी तादाद में कुरूप और भोंडे आदिवासी रहते हैं। हम उनको वहां से हटा रहे हैं और वो जमीन खूबसूरत उद्योगपतियों को दे रहें हैं। हम देश से प्यार करते हैं इसलिए उसे खूबसूरत बनाना चाहते हैं। इसलिए हमने बड़ी तादाद में सुरक्षा बलों को वहां तैनात कर रखा है और उन्होंने काफी इलाका खाली भी करवा लिया है। हमे उम्मीद है की जल्दी ही पूरा इलाका एक खूबसूरत जगह में बदल जायेगा। जहां तक बात वहां के बदसूरत आदिवासियों की है, उनमे से बहुत से लोग तो नक्सली कहकर मारे जा चुके होंगे और बाकि भाग चुके होंगे। लेकिन हम इतना जरूर कहना चाहते हैं की वो कहीं भी भाग लें, उनके लिए इस खूबसूरत देश में कोई जगह नही है। इसका कारण ये है की हमारी योजना पुरे देश को खूबसूरत बनाने की है।
                  हम इस देश के शहरों को खूबसूरत बना रहे हैं। हम वहां से गंदी बस्तियां और झोपड़ियाँ हटा रहे हैं। कई देशद्रोही सवाल उठाते हैं की उनमे रहने वाले लोग कहां जायेंगे। ये लोग देश को खूबसूरत बनाने की हमारी मुहीम में रोड़ा अटका रहे हैं। ये विकास विरोधी लोग हैं और इन्हे इस बात का जवाब देना होगा। जो लोग देश को बदसूरत बनाते हैं, शहरों को गंदा करते हैं उनके साथ सहानुभूति एक तरह का देशद्रोह ही है। उन बस्तियों को हटा कर वहां खूबसूरत मॉल बनाये जायेंगे या फिर खूबसूरत बच्चों के लिए मनोरंजन पार्क बनाये जायेंगे और उनकी एंट्री फ़ीस इतनी रखी जाएगी की बदसूरत बच्चे वहां घुसना तो दूर उसकी कल्पना भी नही कर सकते।
                    देश के विकास के लिए उद्योग धन्धों का विकास  जरूरी होता है। कारखानो का मॉल नही बिकने के कारण हमारे खूबसूरत और प्यारे उद्योगपति बहुत चिंतित थे। इसलिए हमने उनके लिए रास्ता निकाल दिया है। अब वो उद्योग ना लगाएं। हम उन्हें सड़कें, स्कूल, हस्पताल, पार्क, पानी और कचरा उठाने  तक का
काम दे रहे हैं। ये ऐसे काम हैं जिनके बिना कोई जिन्दा नही रह सकता। कुछ दिनों बाद पूरा देश इन खूबसूरत उद्योगपतियों के रहमोकरम पर जिन्दा रहेगा। लोग आखिर जायेंगे कहां ? वो स्कूल जायेगे तो इन्हे पैसा देना पड़ेगा, हस्पताल जायेंगे तो इन्हे पैसा देना पड़ेगा, पानी पिएंगे तो पैसा देना पड़ेगा, यहां तक की मर भी जायेंगे तो श्मशान घाट पर भी पैसा देना पड़ेगा। और ये कोई गलत बात नही है। सतयुग में भी राजा हरिश्चंद्र ने अपने ही पुत्र को जलाने के लिए अपनी ही पत्नी से पैसा माँगा था। हम सतयुगी परम्परा को जिन्दा करेंगे।
                 हम तो किसानो से जमीन लेकर उसे भी खूबसूरत बनाना चाहते थे लेकिन कुछ देशद्रोहियों ने इसमें अड़ंगा लगा दिया। खैर कोई बात नही, अभी हमने इस योजना को वापिस नही लिया है। हम देश के खेत और खलिहानों को भी खूबसूरत बना कर रहेंगे। कुछ गद्दार और बदसूरत किसान आत्महत्या करके विदेशों में देश की बदनामी कर रहे हैं इसे हम बर्दाश्त नही करेंगे। हालाँकि हमने इसे फैशन शो घोषित करके नुकशान को कम करने की कोशिश की है। फिर भी हम सरकार की तरफ से उन्हें चेतावनी जारी करते हैं की भविष्य में जो भी किसान आत्महत्या करेगा उस पर देशद्रोह का केस बना कर जेल में डाल दिया जायेगा।
                 और ये सारे काम करने के लिए हमे सेना की जरूरत पड़ेगी। क्योंकि हम जानते हैं की देश में देशद्रोहियों की संख्या भी कुछ कम नही है। वो सैनिकों को ये बात याद दिलाते रहते हैं की वो भी किसान के बेटे हैं और बेरोजगार नौजवान उनके ही भाई बन्ध हैं। इस तरह की अफवाहें फैलाना देशद्रोह है। इसका मुकाबला करने के लिए हमने एक तरफ तो भक्तों की फौज बनाई है दूसरी तरफ हम सैनिकों को राष्ट्रवाद की शराब भी पिला रहे हैं। क्योंकि अगर वो इस बात को समझना शुरू कर देंगे तो देश को खूबसूरत बनाने का हमारा सपना अधूरा ही रह जायेगा। भारत माता की जय।

Saturday, February 20, 2016

कश्मीर में अलगाववाद और बीजेपी का राष्ट्रवाद

खबरी -- सड़कों पर तिरंगा और राष्ट्रवादी नारे।

गप्पी -- जो लोग हाथों में तिरंगा लेकर और भारत माता की जय के नारे लगाते हुए दिल्ली में और पुरे देश में हुड़दंग मचा रहे हैं उनसे एक निवेदन है -
            वो आरएसएस के नागपुर और दिल्ली स्थित संघ मुख्यालय पर तिरंगा फहराने की मांग करें।
            वो अपने घर  से एक सदस्य को सियाचिन जैसी जगहों पर सेना की नौकरी में भेंजे। देश के
            लिए जान देने का काम केवल किसानो और मजदूरों के बेटों का नही है।
            कश्मीर में पिछले साल से बीजेपी और पीडीपी  की सरकार थी। और अब वहां सीधे रूप में केंद्र
            यानि बीजेपी का शासन है तो वहां हररोज लगने वाले पाकिस्तान समर्थक नारों और ISIS के
             झंडे लहराने वालों पर पिछले एक साल में कोई भी कार्यवाही क्यों नही हुई।

Sunday, February 14, 2016

वामपन्थ पर हमला और संघी राष्ट्रवाद

            JNU की घटना और उसके बाद संघ और बीजेपी सहित सरकार समेत उसके सभी अंग वामपंथ पर टूट पड़े हैं। इनमे वामपंथ को देशद्रोही साबित करने की होड़ लग गयी है। JNU की घटना में वामपंथी छात्र संगठनो की भूमिका को एकतरफा तरीके से दिखाने की कोशिशों के बावजूद, इस बात को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है की ये सारी कवायद बीजेपी सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में आरएसएस के एजेंडे के अनुसार भगवाकरण करने के प्रयास और पुरे देश में वामपंथी छात्र संगठनो के नेतृत्त्व में उसके बढ़ते हुए विरोध के बाद शुरू हुए हैं। शिक्षा को आम आदमी की पहुंच से बाहर करने की कोशिश में लगातार बढ़ाई जा रही फ़ीस, शोध के क्षेत्र में स्कॉलरशिप खत्म किये जाने, और तीसरे दर्जे के लोगों को, जो संघ की विचारधारा के नजदीक हैं, उन्हें शिक्षा संस्थानों में नियुक्त किये जाने का इन संगठनो ने भारी विरोध किया था। इस बार इस विरोध में उनके साथ दलित छात्रों के संगठन और अल्पसंख्यकों के छात्र संगठनो का भी समर्थन था और बीजेपी के लिए इसे आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा था।
              लेकिन इस सबके बावजूद राष्ट्रवाद की ठेकेदारी करने वाले इन संघी संगठनो और वामपंथी संगठनो के पिछले रिकार्ड पर भी एक नजर डालना बेहतर  होगा।
                पंजाब में जब आतंकवाद अपने शिखर पर था और देश की एकता और अखण्डता को चुनौती दे रहा था तब उसके विरोध में कौन खड़ा था। वामपंथी पार्टियों के 200 से ज्यादा नेता इसमें शहीद हुए थे लेकिन उन्होंने अंत तक उसका मुकाबला किया था। बीजेपी बताये की उसके कितने और किस किस नेता ने क़ुरबानी दी थी ? उस समय अकाली दल ने संसद भवन के गेट पर भारत के संविधान की प्रति जलाई थी। उसके बाद से ही अकाली दल और बीजेपी सहयोगी दल हैं।
               बीजेपी हमेशा कश्मीर के मुद्दे को उठाती रही है। लेकिन उसका योगदान वहां आतंकवाद से लड़ने में क्या है ? बीजेपी और उसके अनुपम खेर जैसे समर्थक एक नाम नही बता सकते जिसने कश्मीर में आतंकवाद से लड़ते हुए जान दी हो। हाँ, कश्मीर के नाम पर कमाई जरूर की है फिर चाहे वो सरकार में हिस्सेदारी का मामला हो या पद्म पुरस्कारों का। दूसरी तरफ कश्मीर में सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद युसूफ तारिगामी पर आतंकवादियों के दस से ज्यादा हमले हुए हैं और इन हमलों में उसके 15 से ज्यादा परिवार के सदस्य मारे गए हैं। लेकिन उसने कश्मीर नही छोड़ा और अब भी वहीं है। इस तरह के कई उदाहरण हैं।
                आजादी से पहले तो संघ का रिकार्ड ही अंग्रेजों के सहयोगी का रहा है। लेकिन कुछ तथ्य हैं जिनका आम जनता को नही पता। आजादी से पहले आज की बीजेपी के आराध्य नेता श्यामा प्रशाद मुखर्जी हिन्दू महासभा के नेता होते थे। 1940 में जब जिन्नाह की मुस्लिम लीग ने अलग पाकिस्तान की मांग का प्रस्ताव पास किया, उसके बाद जिन्ना और मुस्लिम लीग का हर कदम पाकिस्तान की तरफ बढ़ रहा था। आजादी से पहले जब अंग्रेज राज के तहत स्थानीय शासन के लिए विधान सभाओं के चुनाव हुए थे उसमे इसी हिन्दू महासभा ने कांग्रेस का विरोध करते हुए मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। हैरत है की इन सारे तथ्यों के बावजूद आज राष्ट्रवाद की ठेकेदारी संघ और बीजेपी कर रही हैं।
                  आज भी मौजूदा समय में संघ और बीजेपी के राष्ट्रवाद और देश प्रेम का एक नमूना मैं यहां देना चाहता हूँ। भारत के लगभग 30 बड़े उद्योगपति, आम जनता के खून पसीने की कमाई का एक लाख चौदह हजार करोड़ रुपया दबा कर बैठ गए। बीजेपी सरकार ने बैंको को इस पैसे की उघराणी करने की बजाए इसे माफ़ कर देने को कहा। बैंको ने ये सारा कर्जा माफ़ कर दिया जबकि इन लोगों के पास लाखों करोड़ की सम्पत्ति है। इसके बाद इन उद्योगपतियों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने की बजाए, बीजेपी सरकार ने इस साल उनमे से दो लोगों को पदमश्री दे दिया। लोगों की मेहनत की कमाई को चर जाने का इनाम। संघ और बीजेपी के राष्ट्रवाद का यही तरीका है। ये रकम पुरे देश के आदिवासियों को पिछले पांच साल में दिए गए बजट प्रावधान से ज्यादा होती है। अब अगर कोई आदिवासी इस पर सवाल  करेगा तो उसे आराम से नक्सली घोषित करके मारा जा सकता है।
                    सरकार के इस काम में अज्ञानी और धर्मान्ध लोगों का एक तबका सहयोग करता है। साथ में कुछ टीवी चैनल, ( जो या तो सीधे तौर पर इस फायदा प्राप्त उद्योगपतियों के होते हैं या फिर उन्हें विज्ञापन के बड़े लाभ दिए जा रहे होते हैं। राज्य सभा की सीट और पद्म पुरस्कार अलग से ) इसमें लगातार सरकारी प्रचार में लगे रहते हैं।
             सवाल ये है की क्या बीजेपी और संघ, वामपंथ पर हमला करके शिक्षा के भगवाकरण और व्यापारीकरण में कामयाब हो जायेगा। या फिर लोग इसे जनतन्त्र पर हमला मान कर विफल कर देंगे।

Tuesday, November 24, 2015

Comment -- आमिर खान का बयान, कश्मीर और भक्तगण

देश में बढ़ती हुई असहिष्णुता के खिलाफ आमिर खान द्वारा दिए गए बयान पर जो प्रतिक्रियाएं आ रही हैं वो अपेक्षित थी। आमिर खान ने ये बयान रामनाथ गोयनका अवार्ड दिए जाने के समय हुए समारोह में दिया और उस वक्त सरकार के कुछ बड़े मंत्री और नेता, जैसे की अरुण जेटली, रविशंकर प्रशाद और संबित पात्रा वहां मौजूद थे। जाहिर है की इस पर प्रतिक्रियाएं भी आनी ही थी। लेकिन इन प्रतिक्रियाओं में एक अजीब किस्म की झल्लाहट झलक रही थी।
               इस पर प्रतिक्रिया करते हुए अनुपम खेर ने कहा की अतुल्य भारत कब से असहनशील हो गया ? संघी कलाकारों  यही मुसीबत है की वो अपने आप को ही भारत समझते हैं। आमिर खान का बयान ना तो भारत के खिलाफ था और ना ही हिन्दुओं के खिलाफ था। ये बयान केवल और केवल उन संघी गुंडा गिरोहों के खिलाफ था जो देश का माहौल बिगाड़ने  कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हमेशा की तरह संघ से जुड़े लोग विशाल हिन्दू बहुमत  पीछे छिपने  कोशिश करते हैं और ऐसा माहोल बनाने की कोशिश करते हैं जैसे वो सारे हिन्दू समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर ऐसा होता तो  आपका बिहार में ये हाल होता ? एक दूसरे प्रवक्ता हैं अशोक पंडित, जो हर जगह घुसने  कोशिश करते हैं और बहस पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं, और जिनके बारे में संघ के ही एक दूसरे प्रशंसक पहलाज निहलानी ने आज ही फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया है उन्होंने भी ऐसी ही हिंदू प्रतिनिधि की मुद्रा अपनाई है। एक बयान परेश रावल का भी आया है जिसमे उसने कहा है की किसी भी देशभक्त को मुसीबत के समय अपनी मातृभूमि को छोड़कर नही भागना चाहिए। उन्होंने ये बयान शायद कश्मीर के संदर्भ में अशोक पंडित और अनुपम खेर के लिए दिया है जो मुसीबत के समय कश्मीर से भाग गए अब हररोज टीवी  कश्मीर-कश्मीर चिल्लाते रहते हैं। मैं कश्मीर और कश्मीरी पंडितों से जुड़े कुछ सवाल इनसे पूछना चाहता हूँ।
१.  क्या कश्मीर में अब एक भी पंडित नही रहता ? और अगर अब भी कश्मीर में पंडित रहते हैं तो वो क्यों भाग आये ?
२.  अब तो कश्मीर में और केंद्र में दोनों जगह आपकी सरकार है, फिर आप वापिस क्यों नही जा रहे ?
३.   अगर अब भी कश्मीर में हालत सामान्य नही है तो आपकी सरकार क्या कर रही है ?
४.   अगर आपको लगता है की कश्मीर के हालात पर सरकार का ज्यादा काबू नही है तो आप पिछली सरकार को क्यों कोसते थे ? क्या उसके पीछे राजनितिक कारण थे ?
५.   आपकी सरकार कश्मीर में लहराते ISIS के झंडों और उन्हें लहराने वालों पर कार्यवाही नही कर पा रही है या करना नही चाहती ?
६.   अगर आपकी सरकार कार्यवाही कर नही पा रही है तो उसका कारण बताइये। और अगर करना नही चाहती तो उसका कारण बताइये। अब ये मत कहना की ये राष्ट्रिय सुरक्षा का मामला है और इस पर बहस नही की जा सकती क्योंकि इस मांग पर आपने हजारों टीवी कार्यक्रम किये हैं।
७.   आपकी सरकार के आने के बाद आपने शरणार्थी कैम्पों में रहने वाले कश्मीरी पंडितों के लिए कौन-कौन सी नई सुविधाएँ लागु की हैं ?
           अगर आपके पास इन सब सवालों का कोई पुख्ता जवाब नही है और अगर आप इन पंडितों को घाटी में वापिस नही बसा पा रहे हैं तो टीवी बहसों में भौकना बंद कीजिये।
                      मेरा एक सवाल और सलाह भक्तों के लिए भी है। वो अपने आप को इस देश और इस देश के हिन्दुओं का ठेकेदार ना समझें। अभी इसका ठेका उन्हें नही मिला है। इस देश में रहने वाला हर नागरिक अपनी समस्याओं और परेशानियों पर अपनी राय रखने का अधिकार रखता है और सरकार से उस पर जवाब और कार्यवाही की उम्मीद भी रखता है और ये अधिकार उसे देश के संविधान ने दिया है। और ये उस संविधान ने दिया है जिसे बनाने में और लागु करने में आपके पूर्वजों की कोई भूमिका नही थी।