Showing posts with label Amit Shah. Show all posts
Showing posts with label Amit Shah. Show all posts

Monday, October 21, 2019

व्यंग - रहिये पानीदार अब पाकिस्तान के पानी से।

               बहुत पहले रहीम ने कहा था ,
रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून,
पानी गए न ऊबरै, माटी, मानुस, चून।
लेकिन लोगों में पानी नहीं बचा। जिन लोगों पर पानी का इंतजाम करने का जिम्मा था, उनमे तो बिलकुल ही नहीं बचा। इसलिए सब जगह पानी की लिए त्राहिमाम मचा हुआ है।
इसी बीच प्रधानमंत्री ने घोषणा कर दी की पाकिस्तान से पानी लाएंगे। मीडिया ने नदियां बहा दी जिससे कुछ जगहों में दुबारा बाढ़ आ गयी। बिना मौसम की बाढ़। लोगों को समझ नहीं आ रहा। अरे भाई ये प्रधानमंत्री और मीडिया की लाई हुई बाढ़ है जो कभी भी आ सकती है।
लोग उत्साहित हैं। अब पानी आएगा भले ही पाकिस्तान से आये। एक बूढ़े आदमी ने तो अपने लड़कों को बुलाकर साफ साफ कह दिया की उनके मुंह में गंगाजल की जगह पाकिस्तान का पानी डाला जाये। पहले दो पानी मशहूर थे, एक गंगाजल और दूसरा आबे जमजम। अब तीसरा भी मशहूर हो गया , पाकिस्तान का पानी। किसी भी चीज की कीमत उसके उत्पादन पर होने वाली मेहनत और जोखिम पर आधारित होती है, इस हिसाब से हिंदुस्तान में सबसे कीमती पानी पाकिस्तान का पानी ही हो सकता है।
तो ये पानी मिलेगा कहाँ ?
इसे आप अमेज़ॉन या फ्लिपकार्ट से खरीद सकते हैं। होम डिलीवरी की सुविधा के साथ। अगर आपको भुगतान की परेशानी है तो किस्तें भी बनवा सकते हैं। इससे व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे। नए रोजगार पैदा होंगे। अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का कितना आसान रास्ता निकल आया। फालतू में अभिजीत बैनर्जी को नोबल पकड़ा दिया जबकि उसका असली हकदार तो कोई और था।
लेकिन ये पानी आएगा कैसे ? बातचीत से ? शटअप। जब तक आतंकवाद बंद नहीं होता तुम  बातचीत का सोच भी कैसे सकते हो ? जब तक पाकिस्तान से ज्यादा बड़ा इमोशनल मुद्दा दूसरा नहीं मिल जाता बातचीत की कोई संभावना नहीं है। मतलब इसकी कोई संभावना ही नहीं है।
फिर कैसे आएगा पानी ? आएगा और जरूर आएगा। प्रधानमंत्री इसे उसी तरह लाएंगे जैसे प्रोमेथियस स्वर्ग से अग्नि लेकर आया था। प्रधानमंत्री अपने देश के लोगों के लिए कुछ भी कर सकते हैं ट्रम्प के लिए चुनाव प्रचार तक। लेकिन इसमें दो समस्या हैं। पहली ये की कैमरामैन कैसे जायेगा ? अगर कैमरामैन नहीं जायेगा तो प्रधानमंत्री भी नहीं जायेंगे। प्रधानमंत्री तो बिना कैमरामैन के बीच से कचरा तक नहीं उठाते फिर पाकिस्तान से पानी लाने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। दूसरी समस्या ये है की किसी ने उन्हें बता दिया की प्रोमेथियस को दी गयी सजा के तौर पर जब गिद्ध उनका मांस नोच रहा था तो लोग हंस रहे थे। कितने नाशुक्रे लोग हैं, अच्छा है की हमने लोगों के लिए कुछ नहीं किया वरना ये हम पर भी हँसते। अब तो हम इन पर हँसते हैं।
तो फिर कैसे आएगा पानी ?
प्रधानमंत्री की अध्यक्ष्ता में कैबिनेट की मीटिंग में इस पर चर्चा हुई।
सर समस्या ये नहीं है की पानी कैसे आएगा, समस्या ये है की पानी हरियाणा में कैसे आएगा ? क्योंकि पाकिस्तान और हरियाणा के बीच में पंजाब पड़ता है जो पानी को हरियाणा जाने नहीं देगा। पहले भी अकाली एक नहर को रेत से भर चुके हैं।
सर हमे अकालियों को साफ साफ कह देना चाहिए की पानी को हरियाणा जाने दें।
हूँ, लेकिन जब तक अकाली हमारे सहयोगी हैं तब तक प्रकाश सिंह बादल नेल्सन मंडेला हैं, जिस दिन वो हमसे अलग होंगे उस दिन वो भी वैसा ही लुटेरा परिवार हो जायेंगे जैसे बाकि राज्यों में हुआ। लेकिन तब तक कोई दूसरा रास्ता निकालो।
अब अमित शाह ने बोलना शुरू किया तो बाकि लोग पहले ही उनके समर्थन में सर हिलाने लगे।  अमित शाह ने कहा की पंजाब और हरियाणा दोनों को मिलाकर एक केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दो। मैं उससे पहले सबको उठवा लेता हूँ। मीडिया को आदेश दे देते हैं की पाकिस्तान पंजाब में ड्रोन भेज रहा था और हमारे पास पक्की खुफ़िआ सूचना है की वो इन  ड्रोन में परमाणु बम भेजने वाला था।
नहीं, अभी कश्मीर का मामला भी नहीं सुलझा है और मुझे महीने में बीस दिन विदेश में रहना होता है, वहां बहुत मुश्किल होती है।
तभी किसी ने याद दिलाया की हरियाणा का चुनाव तो निपट चुका है अब इस पर माथा पच्ची करने की क्या जरूरत है।
और हम फिर बेपानी रह गए।

Saturday, September 17, 2016

Vyang -- आप वो बात क्यूँ पूछते हैं, जो बताने के काबिल नही है।

                  हैडिंग की लाइने किसी दुसरे संदर्भ में लिखी गयी थी। लेकिन अभी देश की जो स्थिति है, उसमे ये एकदम फिट बैठती हैं। हमारे देश में एक बीमारी शुरू हो गयी है। ये बीमारी है बड़े और समर्थ लोगों से पलटकर सवाल पूछने की। इससे स्थिति बड़ी विकट हो जाती है। क्योंकि हमारे देश में बड़े लोगों को केवल सवाल पूछने की आदत है और जवाब देने की आदत तो बिलकुल नही है। जो काम उन्होंने सदियों से नही किया, वो उन्हें आज करने को कहा जायेगा तो मुश्किल तो होगी ही। लेकिन लोग हैं की इस बात को समझते ही नही हैं। अभी देखिये लोग पलटकर क्या क्या पूछ लेते हैं। -
                   अब दिल्ली के LG ने उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को तुरन्त फ़िनलैंड से वापिस दिल्ली आने को कहा ताकि उनके अनुसार दिल्ली की गम्भीर चिकनगुनिया की समस्या को सम्भाला जा सके। अब इस पर होना तो ये चाहिए था की सिसोदिया को तुरन्त जी जनाब कहते हुए वापिस आ जाना चाहिए था। लेकिन नही। वही खराब आदत। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पूछ रहे हैं की जब हालत इतनी ही खराब है तो खुद LG विदेश में क्या कर रहे हैं ? कर लो बात। अब उन्हें कौन समझाये की LG का काम जवाब मांगना है, देना नही। अगर LG को इस तरह के सवालों के जवाब देने पड़े तो हो गयी गवर्नरी।
                      दूसरी तरफ लोगों ने मोदीजी जी को हलकान किया हुआ है। कुछ भी पूछ लेते हैं। 15 लाख वाली बात तो इतनी आम हो गयी है की बच्चा भी पूछ लेता है की कब तक आएंगे। अब ये कोई बात हुई। जब एक बार कह दिया की भाई ये जुमला था, तो अब तो पीछा छोड़ दो। कल मेरे पड़ोसी मुझसे कह रहे थे की जरा मोदीजी से पूछो की वो दस सिर और दाऊद कब आएंगे। मैं हैरान था। मैंने कहा की भाई तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे मैं और मोदीजी रोज शाम को इक्कठे बैठते हों। और दूसरी बात, तुम्हे क्या दस सिरों का अचार डालना है ? रही दाऊद की बात, तो तुम्हारी क्या उधार बाकि है उसकी तरफ जो इतनी बेसब्री से इंतजार कर रहे हो। अब इन सवालों के भला मोदीजी क्या जवाब दें और क्यों दें। प्रधानमंत्री जवाब देने के लिए होते हैं या राज करने के लिए ?
                       अब अमित शाह ने कह दिया की अच्छे दिन आने में तीस साल लगेंगे। कई लोग उखड़ गए। बोले, पहले तो पांच साल कहते थे। अब इस बात का क्या जवाब है ? भई, पहले पांच साल मिल जाएँ यही मुश्किल लग रहा था सो पांच साल कह दिया। अब जब राज मिल ही गया है तो जीवन भर वही रहने का जुगाड़ बिठा रहे हैं। मोदीजी 67 के हो गए, तीस साल बाद 100 के करीब हो जायेंगे सो हिसाब लगा कर तीस साल बोल दिया। अब इस पर भी पलटकर सवाल करोगे तो क्या जवाब दें ?
                     इसलिए मुझे लोगों की ये आदत खराब लग रही है। सवाल पूछने का अधिकार लोकतंत्र में लोगों को नही होता। लोकतंत्र का तो मतलब ही ये होता है की लोक हमेशा तन्त्र में फंसे रहते हैं। और उसके बावजूद भी अगर सवाल पूछने ही हैं तो ऐसे पूछो जैसे अर्णव गोस्वामी या IBN 7 के पत्रकार पूछ रहे थे। आप वो बात क्यूँ पूछते हैं जो बताने के काबिल नही है।

Monday, October 19, 2015

NEWS -- बिहार चुनाव पर नेताओं के बयान

बिहार चुनाव पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा है की " हम पिछड़े और दलितों को साथ लेकर चलेंगे। "

बिहार चुनाव पर लालू यादव ने कहा है की ," हम पिछड़ों और दलितों की खुद की सरकार बनाएंगे। "

बिहार चुनाव पर लेफ्ट के नेताओं ने कहा है की " सरकार बनाने का काम तो खुद लोगों को ही करना है। "

Sunday, October 18, 2015

NEWS -- प्रधानमंत्री की नाराजगी पर मीडिया झूठ बोल रहा है ?

खबरी -- क्या वाकई में प्रधानमंत्री बीफ पर आये बयानों से नाराज हैं ?

गप्पी -- मुझे लगता है की मीडिया बेवजह इस बात को प्रचारित कर रहा है। क्योंकि --
क्या प्रधानमंत्रीजी का कोई बयान आया है ?
नही।
क्या प्रधानमंत्रीजी ने कोई ट्वीट किया है ?
नही।
क्या बीजेपी का कोई बयान आया है ?
नही।
क्या बुलाये गए नेताओं ने ऐसा कहा है ?
नही।
क्या प्रधानमंत्रीजी या अमित शाह ने कोई सार्वजनिक लताड़ लगाई है ?
नही।
तो फिर मीडिया को कैसे पता ?

NEWS -- बीफ बयान पर अमित शाह की बैठक

खबरी -- सुना है बीफ बयान पर प्रधानमंत्री नाराज हैं और अमित शाह ने बयान देने वाले नेताओं को तलब किया है ?

गप्पी -- मुझे नही लगता की प्रधानमंत्री नाराज हैं। अब तक खुद अमित शाह और प्रधानमंत्री बिहार में बीफ पर जोर शोर से बयान दे रहे थे। बिहार में ही गिरिराज सिंह बीफ के सवाल पर जहर उगलते रहे हैं उन्हें तो अमित शाह ने नही रोका। लगता है की बीजेपी को महसूस हो रहा है की बीफ के मामले से फायदा होने की बजाय नुकशान हो रहा है इसलिए वो अपनी स्ट्रैटजी बदल रही है। वरना इन नेताओं पर कार्यवाही हो जाती।

Saturday, October 10, 2015

Vyang -- बिजनेस, नैतिकता और राजनीती

जैसा की हमने पहले बताया था की हमारे मुहल्ले में एक करियाने के दुकानदार हैं और जो अपने आप को बीजेपी के अघोषित प्रवक्ता बताते हैं। हम कई बार उनकी राय जानने की कोशिश करते हैं। और वो बड़े धड़ल्ले से दुनिया के सभी मामलों पर अपना मत देते हैं। अब बिहार चुनाव पर कुछ घटनाएँ जो पिछले दिनों घटी, हमने उन पर उनकी राय जानने की कोशिश की।
          दुआ सलाम के बाद हमने उससे पूछा , " भाई साब ये खबर आई है की आपके तेज तर्रार हिंदूवादी नेता संगीत सोम उत्तर प्रदेश की मशहूर अल-दुआ नाम की बीफ सप्लाई करने वाली कम्पनी के हिस्सेदार रहे हैं, इस पर आपका क्या कहना है। "
            उन्होंने एक दम शान्ति से जवाब दिया ," देखिये लोगों को और खासकर विपक्षी पार्टियों को बिजनेस पर राजनीती नही करनी चाहिए। किसी कम्पनी में हिस्सेदारी  अपना निजी मामला है। किसी के निजी मामलों में दखल देना अच्छी बात नही है। "
            हमे इस जवाब की उम्मीद नही थी। सो कुछ देर हम सदमे की स्थिति में रहे। फिर अपने आप को संभाल कर बोले , " लेकिन अखलाक का परिवार क्या खाता है ये उसका निजी मामला नही था ? और व्यापार में अपनाये जाने वाले तरीके कब से निजी मामला हो गए ?"
              उसने फिर शान्ति से जवाब दिया, " व्यापार में केवल ये पूछा जाना चाहिए की क्या उसके पास लाइसेंस है या नही, अगर है तो बात खत्म हो जानी चाहिए। जहाँ तक अख़लाक़ की बात है वो एक हिन्दू देश में क्या खाता है ये उसका निजी मामला नही है। उसे क्या खाना चाहिए ये हम बताएंगे। इन दोनों मामलों को आपस में मिलाओ मत। अख़लाक़ का बीफ खाना गंभीर मामला है और लाइसेंस लेकर बीफ का निर्यात करना कानून के अनुसार सही है। "
              हमे समझ नही आ रहा था की हम उसके साथ बहस कैसे करें। हमने कहा , " अभी अख़बार में एक लेख आया है की विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अध्यक्ष विष्णु हरी डालमिया का परिवार दूसरे विश्व युद्ध के समय अंग्रेज सेना को गौ-मांस सप्लाई करता था। ऐसे परिवार के सदष्य को विश्व हिन्दू परिषद का अध्यक्ष कैसे बना दिया ?"
               उसने हमे ऐसे देखा जैसे हम पागल हो गए हों। फिर बोला, " आपने फिर बिजनेस की बात की। मैं आपको पहले ही बता चूका हूँ की बिजनेस के मामलों में राजनीती नही करनी चाहिए। और आपने ये ध्यान दिया की डालमिया परिवार ने हिन्दू धर्म की कितनी सेवा की। उन्होंने सारा गौ-मांस अंग्रेजों को खिला दिया और अपने देश के लोगों को धर्म भृष्ट होने से  बचा लिया। मैं फिर आपको कहता हूँ की बिजनेस को राजनीती या नैतिकता से मत जोड़ो। बिजनेस और नैतिकता दोनों विरोधी चीजें हैं। इस तरह तो आप ये पूछोगे की कोई बिजनेसमैन राजनेता पूरा टैक्स देता है या नही। अब टैक्स का राजनीती से क्या लेना देना है ?"
                 " आपका मतलब ये है की कोई आदमी कानून के अनुसार टैक्स ना देकर भी अच्छा राजनेता हो सकता है ? " हमने पूछा।
                 उसने फिर शान्ति से जवाब दिया, " हो सकता है का क्या मतलब है ? होते ही हैं। रोज इनकम टैक्स की रेड होती हैं, लोगों के पास काला धन मिलता है तो कोई पार्टी उसको पार्टी से निकालती है क्या ? बिजनेस, नैतिकता और राजनीती ये अलग अलग चीजें हैं। जब तक तुम इस बात को ठीक से नही समझोगे तब तक राजनीती को नही समझ सकते। "
                "  आपके हिसाब से ये जितने अपराधी आपकी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं उसमे कोई बुराई नही है। " हमने पूछा।
                " उनके आपराधिक मामलों पर कानून अपना काम करेगा और कर रहा है। उन पर कानून के अनुसार चुनाव लड़ने पर कोई रोक तो है नही। फिर उनके चुनाव लड़ने पर सवाल क्यों उठा रहे हो ?" उसने एतराज किया।
                  " आपकी पार्टी पर ये आरोप है की आपने अपनी सरकार होने का फायदा उठाकर अमित शाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील नही की, जिससे वो बच गए। " हमने कहा।
                     वो फिर हमारी नासमझी पर थोड़ा सा मुस्कुराया फिर बोला , " क्या किसी मुसीबत में फंसे भारतीय की मदद करना अपराध है। हमने तो मानवीय कारणों से ललित मोदी तक की मदद की थी। फिर वही कानून का सवाल आता है। कानून में कहां लिखा है की हर मामले की सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। देश की अदालतों पर वैसे ही मुकदमों की संख्या का बहुत भार है जिससे लोगों को न्याय मिलने में देरी हो रही है , हम चाहते हैं की अदालतें दूसरे मामलों पर ध्यान दें ताकि लोगों को जल्दी न्याय मिल सके। क्या लोगों को जल्दी न्याय मिले आपको इस पर एतराज है। " फिर उसने रास्ते पर जाते हुए दो-तीन लोगों को रोक कर ऊँची आवाज में पूछा , " क्यों भाइयो, देश के लोगों को जल्दी न्याय मिलना चाहिए की नही ?" जाने वाले लोगों ने कहा की जरूर मिलना चाहिए।
                        फिर उसने हमारी तरफ देख कर कहा, " देखो जनता भी अमित शाह के मामले में अपील न करने का समर्थन करती है। "
                 सचमुच हमारी समझ में कुछ नही आया और हम बेवकूफों की तरह आगे चले गए।

Monday, September 7, 2015

रिमोट से संचालित लोकतंत्र की सेल

आज के सभी बड़े अख़बारों में डैमोक्रेसी की सेल की खबरें छपी थी। शहर के एक प्रमुख मॉल में डैमोक्रेसी की सेल लगी हुई थी और वह भारी डिस्काउंट पर मिल रही थी। हमने भी डैमोक्रेसी के बारे में बहुत सुना था और उससे हमे भी इच्छा हुई की एक डैमोक्रेसी हम भी ले आये तो अच्छा रहेगा। हम घर से निकलने ही वाले थे की हमारी पत्नी ने कहा की अगर रँग वगैरा अच्छा हो तो एक डैमोक्रेसी उसके लिए भी ले आये। लेकिन उससे पहले दुकानदार से ये पक्का कर लें की अगर पसंद नही आई तो वापिस देंगे। पता नही मेरी पत्नी डैमोक्रेसी को क्या समझ रही थी। परन्तु समस्या ये थी की ठीक ठीक हमे भी मालूम नही था की ये कैसी होती है। थोड़ी देर में हम बाजार में पहुंच गए। बहुत लोग आये हुए थे। सबमे एक अजीब सी ख़ुशी थी। काउन्टर पर खड़ा हुआ एक आदमी सबसे बात कर रहा था। मैंने भी जाकर आहिस्ता से डरते डरते कहा की भाई साब अगर आप ठीक समझें तो हमारे लायक भी एक डेमोक्रेसी दिखा दीजिये।
               सेल्समैन उत्साह में था। तुरंत बोला, " अरे आप लायक की क्या बात करते हैं, हमारे पास तो डेमोक्रेसी के इतने डिजाइन हैं की आपको कोई न कोई तो जरूर पसंद आएगा। हमारे पास दस तरह की तो इम्पोर्टिड डेमोक्रेसी है। ये देखिये अमेरिकी डिजाइन, इसमें आपको बहुत ही ज्यादा फैसलिटी मिलेगी। और हमारे पास तो रिमोट वाली डेमोक्रेसी के भी कई डिजाइन हैं। "
                  रिमोट वाली डेमोक्रेसी ? मैंने आश्चर्य प्रकट किया।
              बिलकुल! और ये डेमोक्रेसी तो हम कई साल से बेच रहे हैं। कोई शिकायत नही है। बस आपको इसका रिमोट हर रोज चार्ज करना पड़ेगा वरना वो काम नही करेगा। हमने ये डेमोक्रेसी बाला साहेब ठाकरे को बेचीं थी, जब तक वो रहे वो इसको रोज चार्ज करते रहे। उनके जाने के बाद ठीक से चार्ज  नही हुआ तो प्रॉब्लम हो गयी।
                क्या कोई भारतीय पीस नही है ? मैंने पूछा।
             हैं, हैं क्यों नही, ये जातीय डेमोक्रेसी है। दूसरी जो आजकल बहुत चल रही है वो रिमोट वाली सनातन डेमोक्रेसी है जो हमने अभी अभी आरएसएस को बेचीं थी। हमने उसका डेमो भी दिया था अभी संघ मुख्यालय में। हर बटन पर सरकार नाच रही थी। खुद भागवत जी ने इसकी तारीफ की है आपने अख़बारों में तो पढ़ा ही होगा। सेल्समैन ने पूरी जानकारी दी।
               दूसरा कोई मॉडल ? मैंने और जानकारी चाही।
        एक मॉडल और था रिमोट वाला जो हमने 10 जनपथ को बेचा था। ठीक काम कर रहा था लेकिन पता नही क्या हुआ कम्पनी ने उसे वापिस ले लिया। सेल्समैन ने निराशा प्रकट की।
               कोई एकदम नया माडल, अच्छे रिमोट के साथ ? मैंने उसके साथ साथ  चलते हुए कहा।
               है लेकिन बहुत महंगा है। अभी अमित शाह लेकर गए हैं। इसका रिमोट दूसरे लोगों पर भी काम करता है। उसे हम सीबीआई डेमोक्रेसी  कहते हैं। उसका डेमो हमने मुलायम सिंह पर दिया था एकदम कामयाब रहा। सेल्समैन ने मेरी हालत पर नजर डाली।
               तभी एक दूसरा ग्राहक आया। सेल्समैन ने उससे पूछा, " कहां से आये हो भाई ?"
                " बिहार से। "
               " अरे, आओ आओ, बिहार के लिए तो हमने स्पेशल स्कीम निकाली है। " सेल्समैन मुझे छोड़कर उसकी तरफ लपका।
                " ये देखो, ये जो डेमोक्रेसी हम बिहार में बेच रहे हैं उसके साथ एक स्पेशल गिफ्ट पैकेज भी दिया जा रहा है। शर्त बस ये है की आपको डेमोक्रेसी अभी खरीदनी पड़ेगी और गिफ्ट पैकेज आपको चुनाव के बाद भेजा जायेगा। " सेल्समैन ने उसे एक पीस दिखाते हुए कहा।
               " लेकिन इस गिफ्ट पैकेज में क्या है ?" उसने पूछा।
              " देखिये ये तो सरपाईज है। इसमें कुछ भी निकल सकता है, हो सकता है 15 लाख निकल जाएँ। " सेल्समैन ने कहा।
              लेकिन बिहारी भी पक्का बिहारी था, उसको बिना देखे भरोसा नही हो रहा था। उसने कहा की पहले पैकेज खोल कर दिखाओ तभी डेमोक्रेसी लेंगे। और वह चला गया।
              " तो तुम दिखा क्यों नही देते ? इस तरह तो तुम्हारा एक भी पीस नही बिकेगा। " मैंने सेल्समैन से कहा।
              " कैसे दिखा दूँ साहब, इसमें प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों की कैसेट हो सकती है, योग सिखाने वाली किताब हो सकती है, प्रधानमंत्री द्वारा ली गयी सैलफ़ियों का संग्रह हो सकता है। और---" सेल्समैन बीच में ही रुक गया।
             "और " मैंने पूछा।
            " जुमला भी हो सकता है। " सेल्समैन वापिस मुड़ गया।

Tuesday, May 26, 2015

Amit Shah on core issues -- अमित शाह धारा 370 व अन्य मुददों पर

खबरी -- अमित शाह ने कहा है की पार्टी को धरा 370 जैसे मुददों को हल करने के लिए 370 सीटें चाहियें। 


गप्पी -- पहले पूर्ण बहुमत , फिर लोकसभा में 370 सीटें, फिर राज्य सभा में बहुमत, उसके बाद अदालतों का रोड़ा , असल में आपको राजतन्त्र चाहिए।  और वो होने वाला नही है।

Thursday, May 21, 2015

Amit Shah's statement on PMO (प्रधानमन्त्री ऑफिस पर अमित शाह का बयान )

खबरी-- मोदी सरकार का एक साल पूरा होने के एक कार्यक्रम में बोलते हुए अमित शाह ने कहा की हमने प्रधानमन्त्री कार्यालय की गरिमा बहाल की। 


गप्पी -- सही बयान ये होता की हमने " केवल " प्रधानमन्त्री कार्यालय की गरिमा बहाल की।