Showing posts with label black money. Show all posts
Showing posts with label black money. Show all posts

Monday, December 5, 2016

जन धन खाता धारकों को चोर क्यों समझती है सरकार ?

             जिन खातों को खुलवाते समय प्रधानमंत्री ये कह रहे थे की गरीब को भी सम्मान देना चाहती है सरकार। की अब गरीब भी ये कह सकता है की उसका बैंक में खाता है। और केवल खाता खुलवा देने को ही अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बता रही थी सरकार। तो ऐसा क्या हो गया की अचानक सभी जन धन खाता धारक सरकार को चोर नजर आने लगे ?
                8 नवम्बर को नोटबन्दी के बाद पुरे देश में बैंको में रुपया जमा होने लगा क्योंकि अब वो बाजार में नही चल सकता था। जिसके पास 500 और 1000 की नोटों में पैसा था वो सब उसे अपने खाते में डालने लगे। यही काम जन धन खातों में भी हुआ। लेकिन सरकार ने दूसरे लोगों का पैसा अपने खातों में जमा करने का आरोप केवल जन धन खातों पर ही लगाया। सरकार का मानना है की जन धन खाता धारकों ने अपने खातों को किराये पर दे दिया और दूसरों का काला धन सफेद करने के लिए इस्तेमाल किया। क्योंकि सरकार का मानना है की जन धन खाता धारकों के पास पैसा कहाँ से आएगा ? जिन खातों को सम्मान का प्रतीक बताकर खुलवाया गया था वो सब चोरी का कारण करार दे दिए गए। ये गरीबों के प्रति सरकार चलाने वालों का पूर्वाग्रह है जो बात चाहे जो भी करें लेकिन उनकी समझ यही है। लेकिन असलियत क्या है ?
               8 नवम्बर नोटबन्दी से पहले भी जन धन खातों में 45000 करोड़ रूपये जमा थे। नोटबन्दी के बाद इनमे 27000 हजार करोड़ रूपये जमा हुए। देश में कुल 25 . 5 करोड़ जन धन खाते हैं। इस तरह औसतन हर खाते में 1100 रूपये जमा हुए। बाकी खातों में करीब 12 लाख करोड़ जमा हो गए। लेकिन उनसे कोई शिकायत नही है। वो तो खाते पीते लोगों के खाते हैं सो उनमे तो सफेद धन जमा हुआ है। क्या सरकार का ये मानना है की देश में केवल 27000 करोड़ का ही काला धन था ? अगर नही तो केवल जन धन खातों को बदनाम करने और उन पर पाबन्दी लगाने का क्या मतलब है। लोगों का जो 45000 करोड़ रुपया उनमे पहले जमा था,  उस पर भी पाबन्दी लगा दी गयी। एक तो दूरदराज के गाँवों में नोटबन्दी के कारण वैसे ही भुखमरी के हालात हैं उस पर ये पाबन्दी उनके लिए निश्चित मौत का पैगाम है।
               बाकी सभी खातों पर खाता अनुसार जाँच होगी और जवाब माँगा जायेगा। लेकिन जन धन खातों को पहले ही काले धन के खाते मान लिया गया है। सरकार की निगाह में हर जन धन खाता धारक चोर है क्योंकि वो गरीब है।

Thursday, April 14, 2016

पनामा पेपर लीक -- एक तरफ दुनिया और एक तरफ हम

                     कुछ दिन पहले पनामा से कुछ पेपर लीक हो गए। सारी दुनिया में बवण्डर मच गया। हमारे देश के भी लगभग 500 लोगों का नाम उसमे होने की खबर है। जो खबरें आई हैं उनमे अमिताभ बच्च्न, ऐशवर्या बच्च्न, अडानी समूह के मालिक गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी, और कांग्रेस के अनुसार छत्तीसगढ़ के नुख्य्मन्त्री रमन सिंह के बेटे अभिषेक का नाम भी उसमे है। अब इसका असर क्या हुआ ?
                      पूरा देश ट्विटर के सामने बैठकर प्रधानमंत्री के ट्वीट का इंतजार करता रहा परन्तु नहीं आया। उसके बाद दुनिया भर में इस पर कुछ प्रतिक्रियाएं इस तरह हैं।
 1.   आइसलैंड के प्रधानमंत्री ने अपना नाम आने के बाद इस्तीफा दे दिया।
 2.   यूक्रेन के प्रधानमंत्री ने अपना नाम आने के बाद इस्तीफा दे दिया।
 3.   ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने अपना नाम आने के बाद खुलासा किया की उनका नाम उनके राजनीती में आने से पहले का है। राजनीती में आने के बाद उन्होंने वहां कोई हिस्सा नहीं रखा। इसके सबूत के रूप में उन्होंने अपनी सभी इनकम टैक्स रिटर्न प्रकाशित कर दी। लेकिन उन पर सवाल अभी बाकी हैं।

                हमारी सरकार ने मुख्य्मंत्री के बेटे का नाम आने पर कहा की इसमें अपराध हुआ ये साबित करो। उसके बाद से सरकार के सभी मंत्री देश को आश्वासन दे रहे हैं की किसी को बख्शा नहीं जायेगा। ठीक उसी तरह जैसे विदेशों में कालाधन छिपाने वालों को नहीं बख्शा गया।

Tuesday, April 5, 2016

पनामा पेपर लीक -- सरकार की साख और गिरेगी ?

                 कालेधन का मुद्दा भारत में एक ज्वलंत मुद्दा है। इतना ज्वलंत की केंद्र और राज्य, दोनों दिल्ली की सरकारें इसी मुद्दे पर बनी हैं। बीजेपी द्वारा कालेधन पर देश के लोगों से किये गए वायदे और बाद में उनसे पीछेहठ उसकी साख को ले डूबा। बीजेपी ने कालेधन पर दो प्रमुख वायदे किये थे। पहला ये की 100 दिन में कालाधन वापिस लाया जायेगा और दूसरा सरकार के पास जो कालेधन वालों के नाम हैं उन्हें उजागर किया जायेगा। बाद में सरकार दोनों से पलट गई। अब ये पनामा पेपर लीक सामने आ गया।
                    पनामा पेपर लीक पर कई बातें सामने आई हैं। जो संस्था इस लीक के लिए जिम्मेदार मानी जाती है, कहते हैं की उसे अमेरिका फण्ड मुहैया करवाता है। लीक पर जो पहला विवाद सामने आया है वो ये है की इसमें केवल अमेरिका विरोधी नेताओं का नाम है। जैसे रुसी राष्ट्रपति पुतिन, चीनी राष्ट्रपति सी जिनपिंग, लीबिया के मरहूम राष्ट्रपति ,गद्दाफी, सीरिया के राष्ट्रपति असद इत्यादि। मध्य पूर्व के कुछ पत्रकार इस पर आष्चर्य व्यक्त कर रहे हैं की इसमें एक भी अमेरिकी, सऊदी अरेबिया, इजराइल और तुर्की के किसी नेता का नाम नहीं है। जबकि तुर्की, सऊदी अरब, इजराइल और अमेरिकी कम्पनियों पर हररोज 4 बिलियन डॉलर तेल की खरीद के बदले में ISIS को भुगतान करने का आरोप है।
                  भारत के मामले में भी लोगों को इस पर हैरानी है की एक भी भारतीय नेता का नाम इसमें नहीं है जबकि लोग नेताओं को कालेधन के मुख्य खिलाडी मानते हैं। खैर ये पेपर सुविधा के हिसाब से लीक किये हो सकते हैं या कुछ नाम इनमे जान बूझकर डाले हो सकते हैं। लेकिन भारत के जिन लोगों के नाम इसमें सामने आये हैं उनमे कुछ लोग नरेंद्र मोदी और बीजेपी के करीबी माने जाते हैं। इसलिए अरुण जेटली के सारे स्वागत के बावजूद लोगों को शक है की लीपापोती शुरू होने वाली है। अगर निकट अवधि में जाँच किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती है तो ये सरकार की गिरती हुई साख को रसातल में पहुंचा देगा। इसलिए सरकार के सामने बड़ी चुनौती है।

Monday, March 14, 2016

Vyang -- शर्म उन्हें मगर नही आती।

                 भक्तो, याद करो कुछ डायलॉग। जिन पर तुम पीटते थे तालियां। बेसुमार। आँखों में चमक लिए। तुम्हारा चेहरा खिल उठता था। याद करो।
                 भाइयो और बहनो ,
                 हमारे देश के दो मछुआरों का खून करके इटली के दो सैनिक अपने देश वापिस चले गए।
                 क्या हमारे मछुआरों के खून की कोई कीमत नही।
                 इटली किसका मायका है ?
                 किसने उन्हें इटली भेजा।
                 क्या उन्हें वापिस  जाना चाहिए ?
                 क्या उन्हें सजा नही मिलनी चाहिए ?
                         ( अब वो दोनों कहां हैं ? और किसके कारण हैं ? )
                 भाइओ और बहनो ,
                ये जो चोर लुटेरों का धन जो विदेशी बैंको में जमा है वो वापिस आना चाहिए की नही ?
                 ये धन देश के विकास में लगना चाहिए की नही ?
                 अगर ये धन में आ जाता है तो हर गरीब आदमी को बैठे बिठाये 15 -20 लाख रूपये तो वैसे ही मिल जाएंगे बिना कुछ किये।
                 अगर मेरी सरकार बनती है तो 100 दिन में अगर ये काला धन वापिस ना आ जाये तो आप मुझे फांसी पर लटका देना।
                         ( क्या कालाधन आया ? क्या कोई फांसी चढ़ा ? )
                 भाइयो , बहनो -
                 ये जो पाकिस्तान हर रोज सीमा पर गोलीबारी कर रहा है वो इसलिए की हमारी सरकार कमजोर है। जरूरत है उससे आँख से आँख मिलाकर बात करने की।
                  मैं लवलेटर लिखने में विश्वास नही रखता।
                          ( बंद हो गयी गोलीबारी ? )
                  भाइयो, और बहनो,
                 ये जो हमारे देश का नौजवान है उसको काम मिलना चाहिए की नही ?
                 ये जो नौजवान पढ़ लिख कर बेकार घूम रहे हैं इनको नौकरी मिलनी चाहिए की नही ?
                   मेरी सरकार आती है तो हर साल दो करोड़ नोजवानो को नौकरियां दी जाएँगी।
                           ( कितने नोजवानो को नौकरियां मिली ? )
                 भाइयो, बहनो,
                   हमारे देश का किसान आत्महत्या कर रहा है उसका कारण है उनको फसलों का सही दाम  नही मिलना। अगर हमारी सरकार आती है तो हम  सुनिश्चित करेंगे की किसान को उसकी लागत से 50 % ज्यादा दाम मिलें। इसके बिना किसानो की हालत नही सुधर सकती।
                            ( फसलों की MSP कितनी बढ़ी ? )