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Tuesday, April 26, 2016

Vyang -- IIT's में संस्कृत लागु करने का समर्थन

खबरी -- मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की IIT में संस्कृत लागु करने की घोषणा पर तुम्हारा क्या विचार है ?

गप्पी -- मैं IIT 's में संस्कृत लागु करने का समर्थन करता हूँ। इसके निम्न कारण हैं।
             1.  देश में मंदिरों,  घाटों और गलियों में धक्के खाते हुए तिलकधारी ब्राह्मणो को रोजगार मिलेगा और लोगों का पीछा छूटेगा।
             2.  शादी में फेरे करवाने के लिए या सत्य नारायण की कथा करवाने के लिए फिर जो पंडित आएगा उसका परिचय इस तरह होगा  प. छछूंदर नाथ मिश्रा - प्रोफसर IIT खड़गपुर। इससे यजमान का रोब  बढ़ेगा।
             3.   संघ में भी कहने को कुछ पढ़े लिखे लोग हो जायेंगे।
             4.  IIT में नए शोध के अवसर पैदा होंगे। जैसे - कान से बच्चा पैदा होना , आदमी की धड़ पर हाथी या दूसरे पशु का सर लगना।
             5. विदेश से कोई पढ़ने नहीं आएगा इसलिए वेदों का सारा ज्ञान हमारे देश को ही मिलेगा।

Saturday, March 12, 2016

विजय माल्या, कांग्रेस के दिए हुए लोन और बीजेपी की जिम्मेदारी

             विजय माल्या चले गए। चले ही जाना चाहिए इस देश में और रखा भी क्या था। जितना उसके लिए रखा था वो तो ले ही लिया। अब जब लगा की वापिस देना पड़ सकता है तो चले गए। जो लोग, नेता और टीवी चैनल आमिर खान पर हफ्तों इस बात पर देशद्रोही होने का आरोप लगा रहे थे की उनकी पत्नी ने ऐसा क्यों कहा की क्या हमे देश छोड़ देना चाहिए, उनमे से किसी ने इस सचमुच देश छोड़ने वाले को गद्दार नही बताया। ना राजनाथ सिंह ने, ना आरएसएस ने, और ना सोशल मीडिया पर बैठे भाड़े के देश भक्तों ने। बताते भी कैसे ? विजय माल्या ने धमकी दी है की सबकी पोल खोल दूंगा दस्तावेजों के साथ।
               लेकिन इसके बाद दूसरा सवाल ये है की जब मामला उठा की उसे जाने कैसे दिया तो बीजेपी ने कहा की सारे लोन कांग्रेस के दिए हुए हैं। अब ये नया तरीका शुरू होगा की कांग्रेस के जमाने के दिए हुए लोन कांग्रेस वसूल करेगी और बीजेपी के जमाने के दिए हुए बीजेपी। तरीका तो सही है। लेकिन मुझे एक गड़बड़ लगती है। जो लोन विश्वनाथ प्रताप सिंह, मोरारजी देसाई या आई. के. गुजराल साहब के जमाने में दिए थे उनको कौन वसूल करेगा। साथ ही अब मुझे लगता है की बैंकों का NPA इसी लिए बढ़ रहा है की वो सारे लोन कांग्रेस के जमाने में दिए गए थे तो बीजेपी सरकार क्यों वसूल करे। देश के उन सारे उद्योगपतियों को अब उस लोन का कोई पैसा चुकाने की जरूरत नही है जो कांग्रेस के जमाने में लिए थे। कभी दुबारा कांग्रेस की सरकार आएगी तो देखेंगे, वरना माले गनीमत समझ कर हजम कर लो।
             दूसरी जो चीज मुझे समझ में आई वो ये की, जो बीजेपी कहती रही है की कांग्रेस मुक्त भारत बनाएगी तो उद्योगपति उसका समर्थन क्यों करते थे। अरे भई, इसका दूसरा मतलब ये भी तो हुआ की कांग्रेस मुक्त भारत और कर्ज मुक्त उद्योगपति। जाहिर है की जो लोन कांग्रेस के जमाने में दिए गए थे उनको वसूल करने की जिम्मेदारी बीजेपी की तो है नही। इसलिए सभी उद्योगपतियों को कर्जमुक्त घोषित कर दिया जाये। और मुझे पूरा विश्वास है की बहुत जल्दी ये कर दिया जायेगा।
               मुझे इसमें कोई बुराई भी नजर नही आती। आखिर किसी दूसरे का दिया हुआ कर्जा कोई दूसरा क्यों वसूल करे। बस मुझे एक ही बात और कहनी है। यही बात बीजेपी सरकार वर्ल्ड बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और दूसरे कर्ज देने वाली संस्थाओं को भी कह दे की तुम्हारे से कर्जा कांग्रेस के जमाने में लिया गया था इसलिए हमसे तो उम्मीद मत रखना। आखिर कांग्रेस के जमाने में लिया हुआ कर्जा बीजेपी क्यों भरे।  जब वसूली की जिम्मेदारी नही है तो देने की जिम्मेदारी भी नही है।
               अब आगे से सारे काम इसी हिसाब से होंगे। स्मृति ईरानी कहती हैं की जिन अधिकारीयों ने रोहित वेमुला को बर्खास्त किया उनकी नियुक्ति कांग्रेस के जमाने में हुई थी हमने नही की। सरकार कहती है की जो एफिडेविट सीबीआई ने बदला उसका जवाब कांग्रेस देगी अधिकारी नही। जिन लोगों पर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वो सभी अधिकारी कह रहे हैं की ये काम हमने कांग्रेस के एक नेता के दबाव में किया था। और ये वो बड़े गर्व से टीवी चैनल पर कह रहे हैं और मौजूदा सरकार उस तालियां पीट रही है की देखो, हम ना कहते थे।
                मुझे केवल एक बात का डर है। कल कोई युद्ध हो जाये और हमारी पिटाई हो जाये तो बीजेपी ये ना कह दे की इन सारे सैनिकों और अधिकारीयों की नियुक्ति कांग्रेस के जमाने में हुई थी। इसलिए मैं कहता हूँ की देश के सारे कर्मचारियों और अधिकारीयों को बर्खास्त करके नई भर्ती की जाये। सारे बैंकों को बंद करके नए बैंक खोले जाएँ। जिनका पैसा जमा है वो कांग्रेस से मांगे। जिनको देना है वो भूल जाये और नया लोन ले। उसके बाद देश में होने वाली घटनाओं की जिम्मेदारी मौजूदा सरकार की होगी। 

Thursday, March 10, 2016

Vyang -- संघ संचालित राजनीती की पाठशाला

               जब से JNU का विवाद हुआ है संघ की परेशानी बढ़ गयी है। वहां के छात्र ऐसे  ऐसे सवाल पूछते हैं की संघ  के प्रवक्ताओं ने टीवी कार्यक्रमों में जाना बंद कर दिया है। इस पर संघ के सभी नेताओं ने बौद्धिक किया और तय  किया की संघ भी राजनीती शास्त्र की एक यूनिवर्सिटी खोलेगा। सबसे पहले इसके लिए एक पाठ्यक्रम तय किया गया जो इस प्रकार है।
१.  गोलवलकर सिद्धांत कौमुदिनी
२.  गोयबल्स सार संग्रह
३.  राष्ट्रवादी आतंकवाद
४.  गाय के राजनैतिक उपयोग
५.  देशोत्थान में गणवेश का महत्तव
६.   गुंडों और उठाईगिरों का सामाजिक सुरक्षा में उपयोग।
७.  मनुस्मृति केवल पीएचडी करने वाले छात्रों के लिए रिजर्व रहेगी।
            ये कुछ मुद्दे तय कर लिए गए और शेष भविष्य की जरूरतों के अनुसार तय करने का निर्णय हुआ। उसके बाद विश्वविद्यालय के दूसरे नियमों का निर्धारण किया गया। जो निम्न प्रकार से होंगे।
              १. विद्यालय में महिलाओं को प्रवेश नही दिया जायेगा। इससे राष्ट्र के भावी कर्णधारों के बिगड़ने का खतरा रहता है। महिलाओं का प्रतिनिधित्व विद्यालय के मुख्यद्वार पर लगी हुई सरस्वती की प्रतिमा करेगी। साथ ही विद्यालय के  इस पर एक पूरा पैराग्राफ लिखा जायेगा जिसमे भारत में महिलाओं की पूजा होने के शास्त्रों में उल्लेख होने का हवाला दिया जायेगा। साथ ही ये भी स्पष्ट किया जायेगा की विद्यालय महिला विरोधी नही है।
             २. दलितों को विद्यालय में प्रवेश की अनुमति होगी। वरना वहां साफ सफाई की समस्या पैदा हो सकती है। लेकिन वर्ण व्यवस्था के अनुसार उनके लिए अलग वर्ग बनाये जायेंगे। अध्यापकों को ये छूट होगी की वो उन वर्गों में पढ़ाना चाहें तो पढ़ा सकते हैं। लेकिन गुरु दक्षिणा पढ़ाई पूरा होने से पहले ही ले ली जाएगी क्योंकि शास्त्रों में ऐसा ही प्रावधान है।
               ३. इस विश्विद्यालय से पढ़े हुए छात्रों को बाल भारती इत्यादि संघ के स्कूलों में नौकरी दी जाएगी। ये छात्र किसी भी दूसरी जगह नौकरी के लिए आवेदन नही करेंगे वरना भेद खुलने का डर रहेगा। सरकार में ऊपर के स्तर की नौकरियां इनके लिए आरक्षित की जाएँगी और उसके लिए मध्य प्रदेश सरकार के व्यापम के अनुभवों से फायदा उठाया जायेगा।
              ४. विश्वविद्यालय के किसी भी छात्र का शैक्षिणक और बौद्धिक स्तर देश के शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से ज्यादा नही होगा ताकि शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाया जाये।
             ५. देश की शिक्षा मंत्री के व्यापक अनुभव व कार्यक्षमता को देखते हुए उन्हें विश्वविद्यालय का आजीवन कुलपति नियुक्त किया जायेगा।
                   इसके आगे के कर्यक्रम और क्लास कल ------------- 

Wednesday, December 9, 2015

Comment and Question on news ---आखिर पैसा कहां गया ?

पिछले डेढ़ साल में मोदी सरकार ने जिन उपलब्धियों का दावा  किया है उनमे सबसे बड़ी उपलब्धि ये है की उसने भृष्टाचार रोककर और देश के संसाधनो के पारदर्शी नीलामी के द्वारा लाखों करोड़ रूपये देश की तिजोरी में डाले हैं। कुछ लोग इन घोषणाओं पर सवाल भी खड़े करते रहे हैं लेकिन सरकार अपने दावों पर अडिग रही है। ये दावे कुछ इस प्रकार हैं।
१. कोयला खदानों की नीलामी से 335000 करोड़ रुपया इकट्ठा करके देश की तिजोरी में डाला गया है। http://timesofindia.indiatimes.com/india/Smriti-Irani-hits-back-at-Sonias-hawa-baazi-jibe/articleshow/48871717.cms  

२. 2 G की नीलामी से करीब 150000 करोड़ रुपया देश के खजाने में डाला गया।
३.  दूसरे खनिज की खदानों की नीलामी का पैसा खजाने में डाला गया।

उसके बाद सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की नीलामी करके हजारों करोड़ रुपया इकट्ठा किया है। सरकार टैक्स की कमाई बढ़ने का दावा भी कर रही है। उसके बाद जो खर्चे की रिपोर्ट है वो इस प्रकार है।

१. मनरेगा में खर्च किये जाने वाले बजट में कटौती की गयी है।
२. बच्चों के दोपहर भोजन के खर्चे में कटौती की गयी है।
३. शिक्षा पर किये जाने वाले खर्चे में कटौती की गयी है।
४. स्वास्थ्य पर खर्च किये जाने वाले बजट में कटौती की गयी है।

इसके अलावा भी कई खर्चों में कटौती की गयी है। मैं कोई बजट का विश्लेषण नही कर रहा हूँ इसलिए सारे आंकड़े यहां देना जरूरी नही है। मैं केवल इस हफ्ते में आई दो खबरों पर सवाल करना चाहता हूँ।

१. सरकार ने खाद उत्पादन करने वाले उद्योगों को कह दिया है की उनकी सरकार की तरफ बकाया 40000 करोड़ रूपये का भुगतान करने की स्थिति में सरकार अभी नही है। इसलिए उन्हें इसके लिए इंतजार करना होगा।
२.  चुनाओं के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के लिए 1 लाख 65 हजार करोड़ के पैकेज की घोषणा की थी। लेकिन अब खबर आई है की केंद्र ने बिहार में बनने वाली ग्रामीण सड़क योजना की फाइल ये कहकर लोटा दी की केंद्र इसके लिए अब 100 % रकम नही दे पायेगा और केवल 60 % रकम ही दे पायेगा।

मैं केवल ये पूछना चाहता हूँ की इतना पैसा आखिर कहां ? या तो सरकार पैसा इकट्ठा करने के झूठे दावे कर रही थी या फिर सरकार कुछ ऐसे खर्चों को छुपा रही है जिनको वो आम जनता को नही बताना चाहती। इस सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए।