Sunday, August 20, 2017

गोरखपुर में हुई बच्चों की मौत के लिए राहुल गाँधी जिम्मेदार

                    गोरखपुर में ऑक्सीजन के बिना हुई बच्चों की मौत के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है ? ये एक ऐसा सवाल बना दिया गया जैसे की ये बहुत बड़ा रहस्य हो। गनीमत है की केंद्रीय गृहमंत्रालय ने FBI को जाँच के लिए नहीं बुलाया। पूरी बीजेपी और उसके चैनल इस पर थूक बिलो रहे हैं और हाथ झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच में कल योगीजी का बयान आया की इसके लिए पिछली सरकार जिम्मेदार है। देश को उनसे ऐसी ही उम्मीद थी। वैसे भी ऐसे लोगों को जिन्होंने मुख्यमंत्री चुना है, उन्होंने कोई विज्ञानं की खोज के लिए थोड़ा न चुना है। इसी तरह की बातें करने के लिए चुना है। किसी पढ़े लिखे को चुन लेते तो उसको ऐसा कहने में दिक्क्त हो सकती थी। इसलिए बीजेपी ने हरियाणा से उत्तरप्रदेश तक हर जगह ऐसे लोगों को ही बिठाया है ताकि कल कोई असुविधा न हो।
                     कल हमारे मुहल्ले के चबूतरे पर इस पर गहन विचार विमर्श हुआ। उसमे व्यक्त किये  गए विचार इस प्रकार हैं। -
                      एक बुजुर्ग ने कहा की भाई जिसे ऑक्सीजन का प्रबंध करना था और जिस सरकार को निगरानी करनी थी उनकी जिम्मेदारी बनती है। बस फिर क्या था। भक्तों में कोहराम मच गया। एक भक्त ने कहा की ये बुड्ढा तो पुराना कांग्रेसी है इसलिए ऐसा कह रहा है। ये बात कोई भी टीवी चैनल नहीं कह रहा।
                     दूसरे भक्त ने हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा की कोई डॉक्टर कफील है जो इसके लिए जिम्मेदार है। उस पर पहले रेप का आरोप लगा है।
                       एक दूसरे आदमी ने कहा की ये कोई छेड़खानी का मामला है क्या जो पिछले रेप का उदाहरण दे रहे हो।
                  इस पर एक भक्त चिल्लाया, ये देशद्रोही है , मैंने इसे पाकिस्तान और इंग्लैंड के मैच में पाकिस्तान की टीम का समर्थन करते देखा है।
                  तभी एक आचार्यजी ने वहां प्रवेश किया जो सीधे संघ के बौद्धिक से पधार रहे थे। भक्तों ने उसके लिए अतिरिक्त सम्मान का परिचय देते हुए उनको इस विषय पर विशेष कमेंट करने के लिए कहा।
                    आचार्यजी ने इधर उधर देखा और कहा , आज संघ के बौद्धिक में इस विषय पर गहन विचार विमर्श हुआ है। इसके सभी पहलुओं की बारीकी से  छानबीन करने के बाद ये निष्कर्ष निकला है। -
                      जैसे योगी जी ने कहा की इसके लिए पिछली सरकार जिम्मेदार है, उससे संघ सहमत है। लेकिन पिछली सरकार से मतलब अखिलेश की सरकार से नहीं है। इसकी जड़ें काफी गहरी हैं। उसके लिए हमे उस आंदोलन तक जाना होगा जिसे देश के कुछ लोग आजादी का आंदोलन कहते हैं। हम उसे आजादी का आंदोलन नहीं कहते, और इसीलिए हमने उसमे हिस्सा नहीं लिया था। हम अंग्रेजो की उस बात से सहमत थे की हिंदुस्तानिओं को शासन करना नहीं आता। और अंग्रेज इस देश को सभ्य बनाने के लिए आये हैं। लेकिन उस समय की कांग्रेस और दूसरे लोगों ने मिलकर अंग्रेजों की इस योजना पर पानी फेर दिया। उस समय तक केवल संघ से जुड़े लोग ही सभ्य हो पाए थे और बाकी सारा देश असभ्य ही था। लेकिन जवाहरलाल नेहरू के सत्ता के लालच ने  अंग्रेजों को अपना सभ्यता का मिशन बीच में ही छोड़कर वापिस जाने के लिए मजबूर कर दिया। वरना अब तक अंग्रेज राज कर रहे होते और हम इस घटना की जिम्मेदारी उन पर डाल सकते थे। लेकिन नेहरू गाँधी परिवार और कांग्रेस के सत्ता के लालच के चलते ऐसा नहीं हो पाया। इसलिए संघ इस घटना के लिए राहुल गाँधी को जिम्मेदार मानता है और उससे देश से माफ़ी मांगने की मांग करता है।
                      भक्तों ने तालियां बजाई और आचार्यजी देश की बाकी समस्याओं पर प्रवचन देने लगे।

Monday, July 31, 2017

बिहार, भाजपा और राष्ट्रवादी भृष्टाचार

                      बिहार में सरकार बदलते ही कई नई चीजें और परिभाषाएँ सामने आयी। जैसे बिहार के पिछले चुनाव में नरेंद्र मोदी ने नितीश कुमार के घोटालों की एक लम्बी लिस्ट जारी की थी। जिसमे करीब 23 घोटाले शामिल थे। जैसे ही नितीश ने बीजेपी के पाले में जाकर सरकार बनाई, मोदीजी ने उसके स्वागत में ट्वीट करते हुए कहा की भृष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में नितीश का स्वागत है। इसका एक तो मतलब ये हुआ की भृष्टाचार का घोटालों से कोई लेना देना नहीं है। भृष्टाचार का लेना देना केवल इस बात से है की आदमी अपनी पार्टी में है या विपक्ष का है। जैसे अभी गुजरात में है। जो जो विधायक बीजेपी में शामिल हो जायेंगे वो भृष्टाचारी नहीं रहेंगे और जो नहीं होंगे वो भृष्टाचारी रहेंगे। बीजेपी में भृष्टाचार की यह परिभाषा सुखराम के जमाने से चली आ रही है।
                     मैं अभी अभी अपने मुहल्ले की किराने की दुकान के सामने से गुजरा तो दुकानदार ने मुझे आवाज लगाई की भाई साहब देखो बिहार में फिर से सुशासन आ गया है। मैंने पूछा की नितीश तो वही है, फिर ये सुशासन कौन है क्या सुशील मोदी का नाम है सुशासन ?
                      देखिये भाई साहब, नितीश जब तक लालू के साथ थे तभी तक भृष्ट थे वरना बिहार में तो लोग उनको सुशासन बाबू के नाम से पुकारते हैं। उन्होंने तेजस्वी यादव से पीछा छुड़ा लिया है। उस पर 120 बी का मुकदमा था।
                     120 बी का मुकदमा तो सुशील मोदी पर भी है। उल्टा दो चार धाराएं ज्यादा ही हैं। फिर बदला क्या ? मैंने पूछा।
                      वो 120 बी दूसरी तरह का है। राजनैतिक बदले की भावना से लगाया हुआ है। उसने कहा।
                     ठीक यही राजनैतिक बदले की बात तो तेजस्वी भी कह रहा है। चलो छोडो। ये बताओ की देश से भृष्टाचार दूर करने के लिए सरकार क्या कर रही है ? मैंने पूछा।
                     बहुत काम कर रही है। अभी अभी लालू यादव पर केस दर्ज किया है।
                      भृष्टाचार के बहुत से केस सीबीआई के पास पेंडिंग हैं। सीबीआई क्या कर रही है ?
                     सीबीआई बहुत काम कर रही है। अभी अभी उसने लालू यादव के कितने ठिकानो पर रेड की है। उसने जवाब दिया।
                       आर्थिक भृष्टाचार के बहुत से मामले ED के पास भी पेंडिंग हैं। ED क्या कर रही है। मैंने पूछा।
                        अभी दो दिन पहले ही ED ने लालू यादव के खिलाफ केस दर्ज किया है। आपने पढ़ा नहीं ? उसने मुझसे पूछा।
                     थोड़े दिन पहले प्रधानमंत्री ने चार्टर्ड अकाउंटेंटस के सम्मेलन में चेतावनी दी थी की जो भी CA किसी को गलत तरिके से टैक्स बचाने में मदद करेगा, उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। क्या हुआ ? मैंने पूछा।
                      लगता आपने अख़बार पढ़ना छोड़ दिया है। अभी अभी लालू यादव की लड़की मीसा भारती  के CA के यहां रेड हुई है  आपको पता होना चाहिए। उसने जवाब दिया।
                       इससे तो ऐसा लगता है की अगर लालू यादव और उसका परिवार देश छोड़ दे तो भारत से भृष्टाचार का खात्मा हो सकता है ? मैंने पूछा।
                         नहीं, नहीं, भाई साहब, देश छोड़ देने से भृष्टाचार थोड़ा न खत्म हो सकता है। उसके लिए तो लालू यादव को राष्ट्रवादी होना पड़ेगा। उसने कहा।
                         उसके लिए क्या करना होगा ? मैंने पूछा।
                          बीजेपी में शामिल होना पड़ेगा। उसने कहा और अपने काम में लग गया।