Wednesday, February 21, 2018

व्यंग -नीरव मोदी को खींच कर लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

PNB घोटाले के बाद माननीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह का बयान आया है की अगर जरूरत पड़ी तो नीरव मोदी को खींच कर लायेंगे। मैं कहता हूँ की जरूरत नहीं पड़ेगी। ये कोई भूखे नंगों का देश है क्या ? क्यों खींच कर लाएंगे और अपनी बेइज्जती करवाएंगे। बाकी दुनिया हमारे बारे में क्या सोचेगी ? कहेगी, देखो कैसा निर्लज्ज देश है जो इतनी सी बात के लिए खींच कर ले गए। 130 करोड़ की आबादी वाला देश इतना प्रबंध भी नहीं कर सका। कैसे विजय माल्या के बाद हमने मिनिमम बैलेंस ना होने पर चार्ज लगा कर नुकशान की भरपाई कर ली थी। अब हम उसको दुगना कर सकते हैं। वरना 5000 रूपये बैलेंस न होने पर 100 रूपये जुर्माना लगा सकते हैं और होने पर 150 रूपये लगा सकते हैं। कोई भी नहीं बच पायेगा। साथ ही हम ये भी कह सकते हैं की गरीबों की सरकार है। जो गरीब लोग 5000 का बैलेंस नहीं रख सकते उन पर तो केवल 100 रूपये ही लगाया है और जो अमीर लोग रख सकते हैं उन पर 150 लगाया है। सबका साथ सबका विकास।
                 इसके अलावा हमारी एक संस्कृति है परम्परा है जो हमे विश्व गुरु बनाती है। इस तरह की तुच्छ बात के लिए हम अपनी हजारों साल पुरानी परम्परा का त्याग तो नहीं कर सकते। हमने ललित मोदी के लिए ऐसा कह दिया था। बाद में याद आया की मानवता भी कोई चीज होती है सो हमने अपनी परम्परा की इज्जत रख ली। कहने को तो हमने दाऊद इब्राहिम को भी खींच कर लाने की बात कही थी। लेकिन दाऊद ने एक बार भी नहीं कहा की हमे खींच कर ले चलो। सो हम क्या करें? हम किसी को जबरदस्ती तो खींच कर नहीं ला सकते। छोटा राजन ने जरूर हमे कहा की अब मैं दाऊद से बचने के लिए इंतजाम करने की पोजीशन में नहीं हूँ, इसलिए इससे पहले की दाऊद मुझे टपका दे, मुझे खींच कर ले चलो। और हम खींच लाये।
                ऐसा ही मामला हाफिज सईद का है। पाकिस्तान हमे इजाजत ही नहीं दे रहा है की खींच ले जाओ, वरना तो कब का खींच लाते। हमने विजय माल्या को भी खींच कर लाने के लिए मनाने की कोशिश की थी लेकिन उसने भी मना कर दिया। सो हम कोई दूसरा ढूंढ रहे हैं।
                 कुछ लोग तो इतने निर्लज्ज हैं की भागे ही नहीं। यहीं मौज़ कर रहे हैं। सो उनको तो खींच कर ला नहीं सकते। इटली के मरीन सैनिकों के मामले में तो हमारी संस्कृति का पतन होते होते बचा। वो तो अच्छा हुआ की हमने इटली की सरकार की बात मानकर उन्हें वहीं रहने की इजाजत सुप्रीम कोर्ट से दिलवा दी वरना कुछ देशविरोधी तत्व तो उनको भी खींच कर लाने की बात करने लगे थे। जो लोग देश की परम्परा और हमारी महान संस्कृति को नहीं समझते, उनके मुंह लगना हमने छोड़ दिया है।
              हाँ तो हम नीरव मोदी की बात कर रहे थे। सो हम माननीय राजनाथ सिंह को विश्वास दिलाते हैं की उसे खींच कर लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अरे कुल रकम ही कितनी होती है। जो लोग पूरा दिन एक बार खाना खाकर रहते हैं वो कुछ दिन दो दिन में एक बार खाकर रह लेंगे तो कोई पहाड़ थोड़ा न टूट पड़ेगा। आखिर देश के लिए किसी न किसी को तो क़ुरबानी देनी ही होती है। पिछले दिनों में बैंको ने ढाई लाख करोड़ माफ़ कर दिया , वित्त मंत्री ने बैंको में दूसरा ढाई लाख करोड़ डालने की घोषणा कर दी। हमने दोनों की रक्षा कर ली, घोटालेबाजों की भी और हमारी महान परम्परा की भी। इस देश में अब तक इतने घोटाले हुए, कुछ लोग भाग गए और कुछ लोग यहीं रह गए, लेकिन हमारा कुछ बिगड़ा ? नहीं बिगड़ सकता। आखिर कवि ने ऐसे ही तो नहीं लिखा था की "कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी " . कवि पहले से जानता था की भले ही गजनवी और गौरी न आएं, भले ही अंग्रेज चले जाएँ, लेकिन हमारे महान देश में लूट की सनातन परम्परा हमेशा जारी रहेगी और हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा। इसलिए हमे नीरव मोदी को खींच कर लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

Sunday, February 18, 2018

व्यंग -- PNB का मोदी और हमारा मोदी

शाम का समय, मोहल्ले के चबूतरे पर हम दस बारह लोग बैठे हुए थे। PNB घोटाला चर्चा का विषय था। तभी सामने से शर्माजी आते हुए दिखाई दिए। सब उनका इंतजार करने लगे। शर्माजी PNB में काम करते हैं। शर्माजी ने भी देख लिया। वो भी निपटने की मुद्रा में आ गए। जैसे ही वो नजदीक आये, एक आदमी बोला,
          क्यों शर्माजी, बैंको में कोई नियम कायदा होता है की नहीं ?
          किसी को भी और कितना ही पैसा यूँ आँख बंद करके दे देते हो। दूसरा बोला।
          कोई गारंटी वारंटी भी लेते हो की नहीं ? तीसरा बोला।
          क्या गारंटी ली थी जो इतना पैसा दे दिया ? चौथा बोला।
शर्माजी उखड़ गए। बोले, तुमने क्या गारंटी ली थी जब पूरा देश दे दिया था ?
          क्या मतलब ? चौथा आदमी बोला।
          मतलब क्या ? हमने एक मोदी पर, उसकी बातों पर भरोसा करके पैसे दे दिए। तुमने भी तो एक मोदी पर भरोसा करके पूरा देश दे दिया। क्या वापिस आया अब तक ? शर्माजी बोले।
          वो तो पंद्रह साल से गुजरात चला रहे थे। पूरा मीडिया वहां के विकास के गुण गा रहा था। पहला आदमी बोला।
            तो वो भी इससे ज्यादा साल से कंपनियां चला रहा था पुरे देश में।  और सारे फ़िल्मी एक्टर उसके साथ फोटो खिंचवाने जाते थे। वो भी कोई ऐरा गेरा नहीं था। शर्माजी ने जवाब दिया।
             लेकिन तुमने साल दो साल उसका व्यवहार देख लिया था तो फिर उसके LOU रिवाइज क्यों किये ? एक आदमी ने प्रतिवाद किया।
             तो तुमने भी तो साल दो साल देख लिया था उसके बाद भी विधानसभाओं में उसके LOU रिवाइज क्यों किये ? शर्माजी पूरी तैयारी में थे।
            लेकिन वो तो अभी बाकी कामों को पूरा करने की कह ही रहे हैं। दूसरा आदमी बोला।
             कहने को तो हमारे वाला भी छह महीने में सारा पैसा चुकाने की कह रहा है, तुम्हारे वाला तो 2022 की बात कर रहा है जबकि उसका समय 2019 में खत्म हो रहा है। शर्माजी ने पलटकर  कहा।
अब किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था।
आखिर में हथियार डालते हुए एक आदमी बोला, चलो ये बताओ की रिकवरी के लिए क्या कर रहे हो ?
शर्माजी ने एक लपेटे हुए पोस्टर को खोलकर दिखाया। जिसमे लिखा हुआ था -
                                                       तलाश है नीरव मोदी की
                                               11500 करोड़ बैंक घोटाले के आरोपी
                                 अंतिम बार प्रधानमंत्री मोदीजी के साथ दावोस में देखे गए
            ये क्यों लिख रहे हो। मोदीजी का जिक्र क्यों कर रहे हो। ये तो गलत बात है। एक आदमी ने एतराज किया।
           तो तुम बता दो उसके बाद कहां देखा था वहां का नाम लिख देते हैं। शर्माजी मुस्कुराये।
इतना कह कर शर्माजी आगे चल पड़े और रुक कर बोले, अरे हाँ, तुम चार साल की रिकवरी के लिए क्या कर रहे हो ?