Thursday, June 18, 2015

लोकतन्त्र की रक्षा के लिए 21 FIR की मन्नत

खबरी -- पुलिस FIR कब दर्ज करती है ?


गप्पी -- हमारे मुहल्ले में एक नेता रहते हैं। सरकारी पार्टी के बड़े नेता हैं। पूरे मुहल्ले में  उनकी दादागिरी चलती है। यहां एक दूसरी छोटी पार्टी के नेता भी रहते हैं। ये आदमी थोड़ा सनकी है और संविधान और कानून में बहुत विश्वास रखता है। जब लगभग सारा देश कानून और संविधान में विश्वास रखना बंद कर चुका है ये तब भी उस पर अड़ा हुआ है। लोगों की मदद करता है इसलिए लोगों की इसके साथ सहानुभूति  है। 

                   अब हुआ ये की दोनों नेताओं का झगड़ा हो  गया। बड़े नेता को यह बात पसन्द नही आई की उसके ही मुहल्ले में कोई उसको चुनौती दे। उसने पुलिस कमिशनर को बुला कर उसे सीधा करने की  सुपारी दे दी। अब सवाल ये खड़ा हुआ की इस पर मुकदमा किस अपराध में बनाया जाये। एक पुलिस वाले की ड्यूटी इसके घर के बाहर लगा दी गयी की एक-एक पल की खबर कमिशनर को दे। सुबह-सुबह ये नेता काम पर जाने के लिए घर से निकला तो देखा की एक आवारा कुत्ता पार्किंग में गंदगी कर  रहा है। उसने एक पत्थर उठा कर उस पर फेंका। पत्थर कुत्ते को लगा और वो चीखता हुआ भाग गया। 

                      पुलिस कमिशनर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया की छोटे नेता के खिलाफ जानवरों पर अत्याचार करने और सोसाइटी की सुरक्षा को खतरे में डालने का मुकदमा दर्ज किया गया है। पत्रकारों ने जब घटना के बारे में जानकारी मांगी तो कमिशनर ने कह  दिया की मामला संवेदनशील है इसलिए जाँच पूरी होने तक और जानकारी नही दी जा सकती। उसे गिरफ्तार कर लिया गया। 

                        शाम को उसके पिताजी घर से बाहर निकले। उन्होंने सिगरेट का आखरी कश लिया और सिगरेट फेंक कर आगे निकल गए। 

                        पुलिस कमिश्नर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया की उसके खिलाफ सार्वजनिक जगह पर धूम्रपान करने और सोसायटी में गन्दगी फ़ैलाने के लिए मुकदमा दर्ज किया गया है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया। 

                     अब घर के दोनों पुरुष सदस्य जेल में थे। घरवाली बेचारी परेशान थी। दो साल का छोटा बच्चा उसे परेशान कर रहा था। उसने झुँझला कर उसे एक चांटा जड़ दिया। बच्चा रोता हुआ बाहर निकल गया। 

                      पुलिस कमिशनर ने प्रेस कांफ्रेन्स की और बताया की उसकी पत्नी के खिलाफ बच्चों पर अत्याचार करने का मुकदमा दर्ज किया गया गया है। बड़े नेता की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उसके खिलाफ प्रदर्शन किया। महिला और बाल कल्याण मंत्री ने इसकी सख्त शब्दों में निन्दा की। बच्चो से संबन्धित आयोग ने उसे नोटिस भेजा। पुलिस गिरफ्तार करने उसके घर पहुंची ,उसकी बूढ़ी माँ ने इसका विरोध किया परन्तु पुलिस उसे गिरफ्तार करके जेल ले गयी। 

                         पुलिस कमिशनर ने फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया की उसकी माँ के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज किया गया है। सरकारी पार्टी के नेताओं ने इस बात की निंदा की कि कम से कम कानून को तो अपना काम करने देना चाहिए। उनके कार्यकर्ताओं ने उसके खिलाफ प्रदर्शन किया और  गिरफ्तारी की मांग की। बुढ़िया की लड़की और जमाई आये और उसे अकेली देखकर अपने साथ ले गए। पुलिस ने घर पर छापा मारा। वहां कोई नही मिला। बुढ़िया को फरार घोषित कर दिया गया। अगले दिन पुलिस ने बुढ़िया को उसकी बेटी के घर से गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी बेटी और दामाद को कानून से भागे हुए अपराधी को शरण देने के अपराध में गिरफ्तार कर लिया गया। 

                      पुलिस कमिशनर ने फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और विश्वास दिलाया की पुलिस इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ करेगी और कानून अपना काम पूरी ईमानदारी से करेगा। कानून की  ये ईमानदारी सरकारी नेता के प्रति है इसका खुलासा करने की उसने जरूरत महसूस नही की क्योंकि 65 साल के लोकतंत्र में जनता इतना तो समझ  ही चुकि होगी। सरकारी पार्टी के नेताओं ने टीवी चैनलों पर इसकी निन्दा की। 

                      घर के सामने ड्यूटी पर तैनात किये गए पुलिस वाले ने कमिशनर को फोन करके कहा की अब यहां तो कोई है नही तो उसके लिए अगला आदेश क्या है। कमिशनर ने उसे डांटते हुए कहा  की उसके दूसरे रिश्तेदारों का पता लगाये और मुहल्ले में  कौन-कौन उसके समर्थक हैं इसका पता लगाये। सरकार ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए 21 FIR की मन्नत मांगी है और जब तक ये पूरी नही हो जाती लगे रहो। 


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